क्या नीतीश के बदले ‘नीतीश’ देगी भाजपा, बिहार में नए CM की रेस में एक और नाम
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से विजय कुमार सिन्हा तक को प्रमोट किए जाने या फिर किसी छुपे रुस्तम को मौका मिलने की अटकलें चल रही हैं। चर्चा यह भी है कि भाजपा बिहार में नीतीश के बदले अपने 'नीतीश' को सीएम बना सकती है।

करीब ढाई दशक तक बिहार की राजनीति की धुरी और दो दशक तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार अब अपना पद छोड़ने जा रहे हैं। नीतीश कुमार गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते हुए एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति की ओर से बढ़ चले हैं। उनके नामांकन के साथ ही यह साफ हो गया है कि बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है, जो पहली बार भाजपा के कोटे से होगा। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से विजय कुमार सिन्हा तक को प्रमोट किए जाने या फिर किसी छुपे रुस्तम को मौका मिलने की अटकलें चल रही हैं। चर्चा यह भी है कि भाजपा बिहार में नीतीश के बदले अपने 'नीतीश' को सीएम बना सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा मधुबनी जिले में झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं। 2000 से 2025 तक वह 5 बार एक ही सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे और कई बार मंत्री रहे हैं। 2025 में भी उनका मंत्री बनना तय माना जा रहा था, लेकिन कैबिनेट में जगह नहीं दिए जाने के बाद से ही चर्चा थी कि उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका दी जा सकती है। अब मुख्यमंत्री के दावेदारों में भी उनका नाम चल रहा है।
क्यों नीतीश मिश्रा का नाम रेस में शामिल
9 जुलाई 1973 को जन्मे नीतीश मिश्रा की गिनती बिहार के युवा और पढ़े लिखे नेताओं में होती है। साफ-सुथरी छवि के नीतीश मिश्रा की मिथिलांचल में जमीनी स्तर पर अच्छी पकड़ है। नीदरलैंड और यूके से पढ़ाई कर चुके नीतीश मिश्रा कई विभागों के मंत्री रहे हैं और इसलिए अनुभव के मोर्चे पर भी वह मजबूत दिखते हैं। वह 2010 से 2015 तक बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री रहे। इस दौरान बीच-बीच में कई और मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार उनके पास रहा। 2008-09 में वह आपदा विभाग भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग समय पर वह गन्ना से उद्योग मंत्रालय तक की जिम्मेदारी बखूबी निभा चुके हैं। इसके अलावा वह बिहार भाजपा के उपाध्यक्ष की भूमिका भी निभाने का अनुभव रखते हैं।
नीतीश कुमार का भी भरोसा हासिल
चूंकि, बिहार में भाजपा को नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ मिलकर सरकार चलानी है, इसलिए किसी ऐसे चेहरे को ही आगे किया जाएगा जिसे मौजूदा सीएम का विश्वास हासिल हो। इस कसौटी पर भी नीतीश मिश्रा फिट बैठते हैं। दरअसल, नीतीश मिश्रा लंबे समय तक जेडीयू के नेता रहे हैं और नीतीश कुमार के मंत्री के रूप में उनके साथ लंबे समय तक करीब से काम कर चुके हैं। विनम्र स्वभाव के मिश्रा की जेडीयू और भाजपा में नए-पुराने नेताओं के साथ तालमेल अच्छा रहा है।
मिथिलांचल को रिर्टन गिफ्ट देना चाहेगी भाजपा
भाजपा को पिछले कुछ चुनावों में मिथिलांचल में भारी बहुमत मिला है। 2025 के विधानसभा चुनाव में 37 में से 31 सीटों पर एनडीए को जीत मिली। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पार्टी मिथिलांचल के किसी चेहरे को सीएम बनाकर इस क्षेत्र को रिटर्न गिफ्ट दे सकती है, जिसका कभी बिहार की राजनीति में बड़ा दबदबा था। जगन्नाथ मिश्रा और भागवत झा जैसे मुख्यमंत्री इसी क्षेत्र से रहे। लालू और नीतीश के उभार के बाद सत्ता में मिथिलांचल की भागीदारी अपेक्षाकृत कम हो गई।




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