कौन पड़ा है गोपाल खेमका के परिवार के पीछे? भाई ICU से लौटा, दूसरा बेटा भी रहा है टारगेट
सुराग मिल गया है, अपराधियों की पहचान हो गई है, रेड चल रही है, संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। बिहार के बड़े व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या तीसरे दिन तक सरकार और पटना पुलिस इससे आगे नहीं पढ़ पाई है या बता नहीं रही है।

बिहार के बड़े व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या का तीसरा दिन बीत रहा है लेकिन सरकार के मंत्रियों और पुलिस के बड़े दावों के बावजूद बात; सुराग मिल गया है, अपराधियों की पहचान हो गई है, रेड चल रही है, संदिग्धों से पूछताछ चल रही है; से आगे नहीं बढ़ पाई है। हत्या की वजह भी अब तक पहेली है क्योंकि परिवार किसी दुश्मनी या धमकी से इनकार कर रहा है। दिसंबर 2018 में बड़े बेटे और भाजपा नेता गुंजन खेमका की हत्या के बाद गोपाल निश्चिंत हो चुके थे और संभवतः उन्हें अपने ऊपर मंडरा रहे खतरे की भनक तक नहीं थी। नहीं तो इतनी रात तक वो क्लब में नहीं रहते और क्लब आने-जाने की रूटीन नहीं बनाते।
सबके मन में यह सवाल है कि आखिर कौन है जो गोपाल खेमका के परिवार के पीछे पड़ा है। लालू यादव के राज में एक भाई आईसीयू से लौटकर आया, जबकि नीतीश कुमार के शासन में बेटे के बाद पिता की हत्या हो गई। 1999 में गोपाल खेमका के भाई विजय खेमका को पटना में उनकी दवा दुकान में ही गोली मार दी गई थी। डॉक्टरों ने बड़ी मुश्किल से उनकी जान बचाई थी और तब वो आईसीयू से लौटे थे।
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2016 में गोपाल के छोटे बेटे डॉक्टर गौरव खेमका पर भी गोली चली जिसमें वो बाल-बाल बच गए। 2018 में बड़े बेटे गुंजन खेमका की हाजीपुर में अपनी कॉटन फैक्ट्री के गेट पर ठीक उसी तरह हत्या हुई जैसे गोपाल को पटना में उनके अपार्टमेंट के गेट पर मारा गया। कार में अपनी सीट से ना बेटा हिल सका था, ना पापा।
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गोपाल कई भाई और बहन हैं। सभी भाई पटना में ही व्यापार करते हैं। दवा के धंधे से गोपाल ने तरक्की कर कई तरह के बिजनेस में हाथ घुसाया और कुछ फैक्ट्री भी लगाई। विजय खेमका को छोड़ दें तो पुलिस फाइल में गोपाल के किसी भाई पर अपराधियों ने ना हाथ डाला, ना कोई धमकी दी। माफियाओं के निशाने पर सिर्फ गोपाल का परिवार ही दिखता है। छोटा बेटा बचा है, जो डॉक्टर है और पिता के गुजरने के बाद व्यापार-धंधे और संपत्ति का एक वारिस है।
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बड़े बेटे की हत्या के बाद पुलिस ने जमीन विवाद की बात बताई थी। गोपाल की हत्या की अब तक ना वजह साफ है, ना ही शूटर और मास्टरमाइंड। हत्या की वजह अगर व्यापार या जमीन है तो पुलिस को ना सिर्फ ट्रिगर दबाने वाले को पकड़ना होगा, बल्कि जिसके कहने पर ट्रिगर दबाया गया, उसे भी दबोचना होगा। गुंजन खेमका की तरह शूटर को पकड़कर जांच को ठंडे बस्ते में डाल देने से काम नहीं चलेगा।
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पुलिस शायद गुंजन मर्डर केस की तह तक गई होती तो गोपाल जिंदा होते। अब अगर पुलिस गोपाल खेमका मर्डर केस की बुनियाद तक नहीं गई तो खेमका परिवार के सदस्यों पर खतरा बना रहेगा। क्योंकि बिना किसी डर और खतरे के जी रहे गोपाल की हत्या ने यह तो बताया है कि परिवार के पीछे कोई पड़ा है। क्यों पड़ा है, कौन पड़ा है, इसका जवाब लिए बिना इस केस को बंद करना खतरनाक होगा। पुलिस ने अभी छोटे बेटे को सुरक्षा दी है, लेकिन बेचैन परिवार को शांति तब मिलेगी, जब गुंजन और गोपाल की हत्या के साजिशकर्ता चाहे एक हों या अलग, गिरफ्तार हो जाएं और पुलिस उन्हें कोर्ट से सजा दिला पाए।




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