नीतीश कुमार जो करने जा रहे, वो अब तक लालू यादव ही कर पाए; तीसरा कोई नहीं
नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन भी कर दिया है। वहीं, नीतीश जो करने जा रहे हैं वो अब तक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ही कर पाए हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर सबको चौंका तो दिया, लेकिन उन्होंने अपने मन की एक इच्छा भी जनता को बता दी। नीतीश ने गुरुवार को जब सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह घोषणा की, तो उसमें लिखा कि वे बिहार विधानसभा, बिहार विधान परिषद, लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं और अब राज्यसभा जाना चाहते हैं। शुरुआत से चारों सदनों का सदस्य बनने की उनकी इच्छा रही है। वह विधायक, एमएलसी और लोकसभा सांसद रह चुके हैं, अब राज्यसभा सांसद बनने जा रहे हैं। रोचक बात यह है कि सीएम नीतीश कुमार जो करने जा रहे हैं, वो बिहार में अब तक सिर्फ एक ही नेता कर पाया है। वो हैं लालू प्रसाद यादव।
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अब तक एकमात्र मुख्यमंत्री हुए हैं, जो बिहार विधान मंडल के दोनों और संसद के दोनों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। अब बतौर मुख्यमंत्री यह उपलब्धि नीतीश के नाम भी दर्ज होने वाली है। लालू के बाद नीतीश दूसरे सीएम होंगे जो चारों सदनों के सदस्य बनेंगे।
हालांकि, गैर-मुख्यमंत्रियों में कुछ-एक नाम हैं, जो इन चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं। इनमें नागमणि, सुशील कुमार मोदी, उपेंद्र कुशवाहा और रामकृपाल यादव शामिल हैं, ये सभी मुख्यमंत्री नहीं रहे हैं।
नीतीश का विधानसभा से संसद तक का पूरा सफर
नीतीश कुमार की बात करें तो साल 1985 में वे पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वे नौवीं लोकसभा के लिए 1989 में पहली बार चुने गए और सांसद बने। इसके बाद 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद बने।
बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश 2006 में पहली बार बिहार विधान परिषद पहुंचे। उसके बाद से लगातार तीन बार 2012, 2018 और 2024 में एमएलसी बनते रहे। इस समय भी वे बिहार विधान परिषद के ही सदस्य हैं। वैसे तो उनका कार्यकाल 2030 तक है। लेकिन राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री के साथ-साथ एमएलसी पद भी छोड़ देंगे।
सर्वाधिक 10 बार सीएम बनने का रिकॉर्ड भी नीतीश के नाम
नीतीश कुमार बीते दो दशक से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे हैं। बिहार में चाहे किसी भी गठबंधन की सरकार हो, सत्ता के मुखिया नीतीश ही रहे। बीच में 9 महीने जीतनराम मांझी के कार्यकाल को छोड़ दें तो 2005 से अब तक नीतीश कुमार ने ही बिहार की बागडोर थामे रखी। उनके नाम सर्वाधिक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।




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