vikramshila setu could not maintain from four years who is responsible for Disconnectivity from north bihar to bhagalpur 4 साल से विक्रमशिला पुल का मेंटेनेंस नहीं, पूर्वोतर और उत्तर बिहार से अंग का संपर्क तोड़ने का जिम्मेदार कौन?, Bihar Hindi News - Hindustan
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4 साल से विक्रमशिला पुल का मेंटेनेंस नहीं, पूर्वोतर और उत्तर बिहार से अंग का संपर्क तोड़ने का जिम्मेदार कौन?

करीब 4.700 किलोमीटर लंबे इस पुल के मेंटेनेंस के संभावित खर्च पर मंथन किया जा रहा है। सेतु की मरम्मत पर करीब 12 करोड़ के खर्च का प्राक्कलन भागलपुर से भेजा गया है। जिस पर पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्त विभाग से मंतव्य और मदद मांगी है।

Mon, 4 May 2026 11:56 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, मुख्य संवाददाता, भागलपुर
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4 साल से विक्रमशिला पुल का मेंटेनेंस नहीं, पूर्वोतर और उत्तर बिहार से अंग का संपर्क तोड़ने का जिम्मेदार कौन?

अंग क्षेत्र को कोसी-सीमांचल समेत पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु के कुछ हिस्सों के टूट जाने से हड़कंप मच गया है। कहा जा रहा है कि यह एक बड़ी लापरवही का नतीजा है। रविवार की रात करीब 12 बजे के बाद सेतु पर 133 नंबर पोल के पास कुछ हिस्सा धंस गया। उसी वक्त आवागमन रोक दिया गया। लेकिन कुछ ही देर बाद वह हिस्सा टूट गया। अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर पूर्वोतर और उत्तर बिहार से अंग का संपर्क तोड़ने का जिम्मेदार कौन है? बताया जा रहा है कि करीब 4 साल से पुल का मेंटेनेंस नहीं हो रहा था। इस पुल को कई दिनों से मरम्मत की जरुरत थी।

ऐसी सूचन है कि अंग क्षेत्र को कोसी-सीमांचल समेत पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के लिए सरकार तैयार हो गई है। करीब 4.700 किलोमीटर लंबे इस पुल के मेंटेनेंस के संभावित खर्च पर मंथन किया जा रहा है। सेतु की मरम्मत पर करीब 12 करोड़ के खर्च का प्राक्कलन भागलपुर से भेजा गया है। जिस पर पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्त विभाग से मंतव्य और मदद मांगी है। यहां आपको बता दें कि लाइव हिन्दुस्ता ने पुल पर मंडरा रहे खतरे को लेकर एक महीना पहले भी आगाह किया था, लेकिन जिम्मेवार लोगों ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया

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बहरहाल अभी विभाग की योजना है कि मानसून या बरसात गिरने से पहले सेतु की मरम्मत करा ली जाए। अभी हाल ही पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मुख्यालय की टीम के साथ सेतु का निरीक्षण किया था और मेंटेनेंस को जरूरी बताते हुए प्राक्कलन भेजने को कहा था। कुछ दिन पहले पीरपैंती आगमन के दौरान भी सचिव ने विक्रमशिला सेतु को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारियों से बात की थी।

मेंटेनेंस से रोहरा रीबिल्ड ने हाथ खींचा

विभाग को भेजे गए प्राक्कलन में बताया गया है कि पिछली बार वर्ष 2016 में मरम्मत का काम शुरू हुआ था। सभी पिलरों की बियरिंग बदली गई थी। चौथे और पांचवें पिलर के स्पैन की दरारों में कार्बन प्लेट चिपकाई गई थी। मुंबई की रोहरा रीबिल्ड एसोसिएट्स को चार साल तक मेंटेनेंस का भी ठेका मिला था। लेकिन 2020-21 के बाद से रोहरा रीबिल्ड ने मेंटेनेंस से भी हाथ खींच लिया। सेतु की सड़क और रेलिंग जब जर्जर होने लगी तब एनएच डिवीजन ने मेंटेनेंस कराना शुरू किया।

चार साल से प्रति वर्ष मेंटेनेंस कराया जाता है। लेकिन एजेंसी द्वारा सिर्फ सड़क पर गिरे बालू-गिट्टी को हटाया जाता है और बिजली के खंभों के बल्ब बदले जाते हैं। बियरिंग, एक्सपेंशन गैप, कार्बन प्लेट, कालीकरण आदि का काम नहीं हो पाता है। कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार ने बताया कि प्राक्कलन पर मुख्यालय के स्तर से निर्णय लिया जाएगा।

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