How vikramshila setu collapse in ganga north bihar connectivity loss uttar pradesh company built bridge एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप, विक्रमशिला सेतु का हिस्सा कैसे गंगा में समाया; यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन ने बनाया था, Bihar Hindi News - Hindustan
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एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप, विक्रमशिला सेतु का हिस्सा कैसे गंगा में समाया; यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन ने बनाया था

Vikramshila Setu: विक्रमशिला सेतु का निर्माण यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने कराया था। यह पुल 2001 में चालू हुआ। 2016-2017 में खगड़िया पुल निर्माण निगम की देखरेख में 16 करोड़ रुपये की लागत से इसकी मरम्मत करायी गई थी।

Mon, 4 May 2026 07:43 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान टीम, भागलपुर
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एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप, विक्रमशिला सेतु का हिस्सा कैसे गंगा में समाया; यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन ने बनाया था

बिहार के भागलपुर जिले को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु (Vikramshila Setu) के कुछ हिस्सों के गंगा नदी में समा जाने से हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस-प्रशासन पुल के हिस्से के टूटने की वजहों को लेकर तकनीकी पहलुओं की जांच में जुटा है तो वहीं आम लोग भी इस पुल का हश्र देख कर हैरान हैं। विक्रमशिला पुल की पोल संख्या 137 के पास कुछ दूर पुल का हिस्सा टूट गया है। ट्रैफिक डीएसपी संजय कुमार ने बताया कि पहले पुल पर 133 -134 पोल (भागलपुर की तरफ से पाया संख्या 4-5 के बीच) के पास पुल धंसा। धंसने की सूचना के साथ ही आवागमन रोक दिया गया। मौके पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की गई। लेकिन थोड़ी देर बाद पुल का वह हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगी है।

2001 में यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने कराया था निर्माण

विक्रमशिला सेतु का निर्माण यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने कराया था। यह पुल 2001 में चालू हुआ। 2016-2017 में खगड़िया पुल निर्माण निगम की देखरेख में 16 करोड़ रुपये की लागत से इसकी मरम्मत करायी गई थी। उस समय सभी एक्सपेंशन ज्वाइंट और बियरिंग बदले गए और सड़कों का खोदकर नया निर्माण कराया गया। साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क में मास्टिक बिछाई गई। लेकिन पांच-छह साल बाद ही एक्सपेंशन ज्वाइंट खराब होने लगे, जिनके गैप बढ़ने से बियरिंग पर असर पड़ा। खराब ज्वाइंट के कारण वाहनों को धड़ाम-धड़ाम की आवाज़ सुनाई दे रहा था और उछाल महसूस होता है। भारी वाहन चलाने पर पुल में अत्यधिक कंपन भी हो रहा था। आपको बता दें कि ‘लाइव हिन्दुस्तान’ ने पुल पर मंडरा रहे खतरे को लेकर एक महीना पहले भी आगाह किया था, लेकिन जिम्मेवार लोगों ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया।

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बढ़ते गैप और यातायात पर असर

एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप बढ़ने के कारण रेलिंग के बीच भी जगह बढ़ गई है। यह खतरे का कारण बना और धीरे-धीरे यह स्थिति बनी कि आज पुल का लगभग 20 मीटर हिस्सा सड़क एवं सुपर स्ट्रक्चर सहित नदी में समा गया है। इसके पहले पिलर का प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त हुआ था और अधिकारियों ने जांच और स्टीमेट प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन तमाम चीजें टेंडर और फाइलों में ही घूमती रही।

विक्रमशिला सेतु एक नजर में-:

4.700 किमी लंबा पुल

23 जून 2001 में हुआ चालू

पिलर 17, 18 व 19 का प्रोटेक्शन वॉल टूट गया था

टू लेन का पुल है, दोनों ओर फुटपाथ बना है

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