पितृपक्ष में ऑनलाइन पिंडदान स्कीम से VHP और पंडा नाराज, बोले- सनातन धर्म का महत्व हो रहा कम; बंद करने की मांग
मशहूर पंडा महेश लाल गुप्त ने कहा कि पिंडदान के वक्त पिंडदान करने वाला शख्स ‘अस्मत पिता’ (मेरे पिता) कहता है। क्या उसकी जगह कोई अन्य प्रतिनिधि यह बात कह सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह पिंडदान करना सनातन धर्म के महत्व को कम करता है।

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने कुछ समय पहले ही ऑनलाइन पिंडदान की शुरुआत की थी। लेकिन सरकार की यह ऑनलाइन पिंडदान कराने की योजना अब विवादों में घिर गई है। गया के कई पंडा और विश्व हिंदू परिषद ने ऑनलाइन पिंडदान पर सवाल उठाए हैं। इस स्कीम के तहत पिंडदान के इच्छुक लोगों को पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों का ऑनलाइन पिंडदान करने की सुविधा मिलती है लेकिन पंडों का कहना है कि ऑनलाइन पिंडदान योजना में धार्मिक मान्यताओं की अनदेखी की गई है।
नई योजना के तहत जो लोग पिंडदान करने के लिए गया नहीं जा सकते हैं वो एकमुश्त 23,000 रुपये देकर अपने पूर्वजों का पिंडदान करा सकते हैं। पिंडदान करने वाले की गैरहाजिरी में स्थानीय पुजारी पूजा-पाठ करेंगे। इस पूरे पूजा-पाठ की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई जाएगी और वीडियो रिकॉर्डिंग की एक कॉपी पिंडदान करवाने वाले शख्स को पेन ड्राइव में दी जाएगी। 6 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। पर्यटन विभाग ने बुकिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया है। हालांकि, इन नए स्कीम की काफी आलोचना भी हो रही है।
VHP और पंडा को क्या है दिक्कत…
'Times Of India' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष मणि लाल बारिक ने इस तरह पिंडदान कराने की आलोचना की है। उन्होंने गरुण पुराण में लिखी बातों का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ बेटा या परिवार का कोई अन्य पुरुष सदस्य ही पिंडदान कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह रिवाज सिर्फ पवित्र स्थलों जैसे- विष्णुपद, फल्गू और अक्षय वट जैसे स्थानों पर ही होना चाहिए। इन्हें दूसरी जगहों से करना मान्यताओं का उल्लंघन है।’
इसी तरह एक मशहूर पंडा महेश लाल गुप्त ने भी अपने विचार प्रकट किए। महेश लाल पंडा की गिनती एक बड़े पंडा के तौर पर होती है उनके क्लाइंट राजस्थान, गुजरात और नेपाल में भी हैं। उन्होंने कहा कि पिंडदान के वक्त पिंडदान करने वाला शख्स ‘अस्मत पिता’ (मेरे पिता) कहता है। क्या उसकी जगह कोई अन्य प्रतिनिधि यह बात कह सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह पिंडदान करना सनातन धर्म के महत्व को कम करता है। महेश लाल गुप्त ने सरकार से आग्रह किया है कि वो इस स्कीम को वापस ले लें। उन्होंने कहा कि जो लोग भी हिंदू धर्म की भावनाओं को समझते हैं वो इस स्कीम को स्वीकार नहीं करेंगे।
क्या बोले नीतीश सरकार के मंत्री
इधर गया शहर के विधायक और नीतीश सरकार के सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार ने पंडाओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर कहा कि निश्चित तौर से उनकी भावनाओं का कद्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उचित स्तर पर मामले की समीक्षा की जाएगी।




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