मेरे भतीजे, बधाई हो; चिराग पासवान को चाचा पशुपति पारस ने 2 घंटे में दो बार दी जीत की बधाई
बिहार विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भतीजे चिराग पासवान को चाचा पशुपति पारस ने दो घंटे में दो बार बधाई दी। चाचा और भतीजा में दिवंगत रामविलास पासवान की विरासत को लेकर लंबे समय से तकरार चल रही है।

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के प्रमुख एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने भतीजे एवं लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को 2 घंटे के अंदर दो बार बधाई भी दी। पारस ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पहले एनडीए के घटक दलों को शुभकामनाएं दीं। इसके लगभग दो घंटे बाद उन्होंने ट्वीट कर अलग से भतीजे चिराग को चुनाव में शानदार जीत की बधाई दी।
पशुपति पारस ने रविवार दोपहर 2.20 बजे आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर लिखा- बिहार चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत के लिए सभी घटक दलों को बधाई और शुभकामनाएं। आशा है एनडीए की सरकार बिहार के विकास को नई दिशा देगी।
फिर शाम को 4:09 बजे उन्होंने एक और पोस्ट किया, जिसमें लिखा- मेरे भतीजे, केंद्री मंत्री और लोजपा(र) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को बिहार विधान सभा चुनाव में मिली शाानदार जीत के लिए बधाई और शुभकामनाएं।
पिछले साल लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान के गुट वाले लोजपा की एनडीए में वापसी के बाद पशुपति पारस साइडलाइन कर दिए गए थे। उन्होंने नरेंद्र मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने चिराग गुट को तरजीह देते हुए पारस की रालोजपा को एक भी सीट नहीं दी थी। बाद में पारस ने एनडीए छोड़ दिया।
एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ी थी रालोजपा
इस साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पारस के महागठबंधन में जाने की चर्चा चली। इस बारे में तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के अन्य नेताओं से उनकी पार्टी की बात भी हुई, मगर सीटों पर बात नहीं बनने की वजह से पारस ने अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया। रालोजपा ने कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे। पशुपति पारस ने बेटे यश राज को खगड़िया जिले की अलौली विधानसभा सीट से लड़ाया। हालांकि, सभी को करारी हार मिली।
दूसरी ओर, चिराग पासवान की लोजपा-आर ने एनडीए में रहकर 29 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, जिसमें से 19 पर जीत दर्ज की। इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 में भी लोजपा-आर ने एनडीए में 5 सीटें लड़कर पांचों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद चिराग, मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाए गए थे।
दरअसल, लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी विरासत को लेकर पशुपति पारस और चिराग पासवान में तकरार हो गई थी। इसके बाद लोजपा में टूट हुई और चाचा पारस ने रालोजपा नाम से अलग पार्टी बनाई, जबकि भतीजे चिराग ने लोजपा-आर नाम से दल बनाया। उस समय चिराग को छोड़कर लोजपा के अन्य सभी सांसद पारस के साथ आ गए थे। इस कारण चिराग को एनडीए से बाहर होना पड़ा था।




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