DDU स्टेशन से पटना तक बिछेगी तीसरी-चौथी लाइन, टाइम पर ट्रेनों को चलाने का प्लान तैयार
Indian Railway: रेलवे के अनुसार, वर्तमान में झाझा से डीडीयू के बीच नियमित 280 से 292 ट्रेनें प्रतिदिन गुजरती है। जो दो लाइन के हिसाब से बहुत अधिक है। त्योहार या अन्य विशेष परिस्थितियों में यात्रियों की अधिक भीड़ के कारण रेलवे स्पेशल या पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाता है।

Indian Railway: पंडित दीनदयाल उपाध्याय से झाझा तक 17 हजार करोड़ रुपये की लागत से तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। डीडीयू से किऊल तक तीसरी और चौथी लाइन बनेगी, जबकि किऊल से झाझा के बीच सिर्फ तीसरी लाइन बनेगी। नई रेल लाइन के लिए रेलवे ने इंजीनियरिंग स्केल प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। पटरी को कहां और कैसे बिछाया जाएगा, इसके लिए कितनी जमीन की जरूरत पड़ेगी और विभिन्न स्टेशनों के पास से लाइन को कैसे निकाला जाएगा आदि बिंदुओं पर विस्तृत डिजाइन तैयार की जा रही है। रेलवे के अनुसार डीडीयू से झाझा के बीच तीसरी लाइन बिछाने के लिए बोर्ड से सहमति मिल गई है। इसके बाद इंजीनियरिंग स्केल प्लान तैयार किया जा रहा है। प्लान के अलग-अलग भाग को मंजूरी के लिए बोर्ड भेजा जाएगा।
पिछले सप्ताह रेलवे और राज्य सरकार के बीच इस मसले पर बैठक भी हुई थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं। बैठक में तीसरी और चौथी लाइन के विस्तार को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई और सहमति बनी। बताया गया कि गुलजारबाग एवं पटना साहिब स्टेशनों के बीच उत्तर दिशा की ओर दो किलोमीटर जमीन पर बिहार सरकार और रेलवे का आधारभूत संरचना है। बिहार सरकार ने लगभग 4 मीटर जमीन रेलवे को तीसरी लाइन के लिए देने पर सहमति दी और समानांतर एक एलिवेटेड सड़क के निर्माण के साथ 3.5 मीटर का सर्विस रोड भी बनाया जाएगा। इससे लोगों के आवागमन पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण में गति आएगी।
तीसरी-चौथी रेल लाइन का इस तरह निर्माण होगा
● पंडित दीनदयाल उपाध्याय से पटना तक तीसरी-चौथी लाइन का निर्माण
● राजेंद्रनगर से फतुहा के बीच तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा
● नेऊरा-जटडुमरी-दनियावां के रास्ते फतुहा तक चौथी लाइन बिछेगी
● फतुहा से किऊल के बीच तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण होगा
● किऊल से झाझा के बीच सिर्फ तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा
रेलवे के अनुसार, वर्तमान में झाझा से डीडीयू के बीच नियमित 280 से 292 ट्रेनें प्रतिदिन गुजरती है। जो दो लाइन के हिसाब से बहुत अधिक है। त्योहार या अन्य विशेष परिस्थितियों में यात्रियों की अधिक भीड़ के कारण रेलवे स्पेशल या पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाता है। ऐसे में ट्रैक पर दबाव बढ़ने से ज्यादातर स्पेशल ट्रेन विलंब से चलती हैं। मगर तीसरी और चौथी लाइन बनने के बाद जहां ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, वहीं स्पेशल ट्रेन में भी निर्धारित समय पर गंतव्य को पहुंच सकेगी।




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