सुपौल : गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश, मूंग-मक्का की फसल को नुकसान
सुपौल में मौसम में अचानक बदलाव आया है, जिससे सुबह 6 बजे से झमाझम बारिश शुरू हुई। बारिश के कारण सड़कों पर पानी जमा हो गया और लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। मौसम विभाग ने 8 जून तक आंधी और बारिश की संभावना जताई है। कृषि क्षेत्र पर भी इसका मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है।

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में बुधवार को मौसम ने अचानक करवट ली और गरज-चमक के साथ कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई। सुबह करीब 6 बजे से ही आसमान में घने बादल छा गए थे। इसके बाद लगभग एक घंटे तक तेज बारिश हुई, जिससे सड़कों पर पानी जमा हो गया और लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई।
बारिश के बाद मौसम का असर
बारिश थमने के बाद भी आसमान में दिनभर बादलों का डेरा बना रहा और बीच-बीच में धूप निकलने से मौसम में उमस बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 8 जून तक जिले में आंधी और बारिश की संभावना बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और पूरवा हवा के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है। बारिश के कारण अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, दोपहर करीब 11 बजे के बाद जैसे ही धूप निकली, उमस बढ़ने से लोग पसीने से तरबतर नजर आए। मौसम में आए इस अचानक बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। सदर अस्पताल और निजी क्लीनिकों में सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग मौसम के अनुसार कपड़े पहनें, ठंडे-गर्म से बचें और साफ पानी का सेवन करें। वहीं मौसम वैज्ञानिकों ने भी अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
कृषि पर बारिश का प्रभाव
कृषि क्षेत्र में इस बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिला है। सांख्यिकी विभाग के अनुसार जिले में 17.88 एमएम वर्षा दर्ज की गई है। जहां कुछ फसलों को इससे फायदा हो सकता है, वहीं तेज हवा और लगातार बारिश के कारण मूंग की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में लगी मक्का की फसल भी आंशिक रूप से प्रभावित हुई है। कई किसानों ने बताया कि तेज हवा के कारण पौधे झुक गए हैं और पानी भरने से जड़ सड़ने का खतरा बढ़ गया है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों से अतिरक्ति पानी की निकासी की व्यवस्था करें और फसलों की नियमित निगरानी करें। जरूरत पड़ने पर उचित दवा का छिड़काव करें, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
बारिश के आंकड़े
सांख्यिकी विभाग के मुताबिक बुधवार को जिले में 17.88 एमएम औसत बारिश हुई। सबसे अधिक सरायगढ़-भपटियाही में 43.4 मिलीमीटर, किशनपुर में 32.2 मिलीमीटर, सदर प्रखंड में 26.4 मिमी, त्रिवेणीगंज में 12.4, पिपरा में 20.2 मिमी, राघोपुर में 17.6 मिमी, प्रतापगंज में 13.2 मिमी, मरौना में 12.8 व नर्मिली में 12.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। दो दिनों से लगातार के कारण कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शहर के कचहरी से च्ड्रिरेन पार्क जाने वाली सड़क हो या फिर वार्ड 13 के रिंग बांध जाने वाली सड़क समेत अन्य जगहों पर पानी का जमाव हो गया हैजिससे लोगों को आवागमन में दक्कित हो रही है।
किसानों की चिंता
इस मौसम में अब तक तीसरी बार तेज आंधी और बारिश आ चुकी है। जब आम और लीची में मंजर लगे थे, तो पहली बार मार्च में बारिश के कारण आम और लीची के मंजर खराब हुए थे। इसके बाद अप्रैल में दूसरी बार आंधी बारिश ने आम के टिकोले और लीची में लगे फलों को गिराया और खराब किया। अब तीसरी बार मई के प्रथम सप्ताह में हुई तेज आंधी और बारिश ने फल उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। आम और लीची के फल गिरने के साथ ही लीची में कीड़े लगने का खतरा बढ़ गया है।
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