सीवान के ईओ अनुभूति ने शेल कंपनियों में लगाई काली कमाई, लखनऊ से महंगी गाड़ियां जब्त
सीवान नगर परिषद के ईओ अनुभूति श्रीवास्तव द्वारा शेल कंपनियां बनाकर उनमें अपनी काली कमाई जमा करने का पता चला है। ईओयू की छापेमारी में ईओ के लखनऊ वाले घर से महंगा गाड़ियां बरामद की गई हैं।

बिहार के सीवान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) अनुभूति श्रीवास्तव के 3 ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की छापेमारी पूरी हो गई है। छापेमारी में पता चला है कि ईओ ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में शेल कंपनियां बनाकर अपनी अवैध कमाई जमा कराई। अनुभूति के ठिकानों से 6.66 लाख रुपये नकद, जबकि उनके एवं परिजन के नाम पर 21 बैंक खातों में 1.48 करोड़ रुपये जमा होने का पता चला है। इसके साथ ही लखनऊ में 2024-25 में ही खरीदी गई फार्च्यूनर और इनोवा जैसी महंगी गाड़ियों के साथ ही जमीन, फ्लैट एवं विभिन्न खर्चों से संबंधित दस्तावेजों की बरामदगी हुई है।
आर्थिक अपराध इकाई ने गुरुवार को बताया कि नगर कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव के लखनऊ में गोमती नगर स्थित आवासीय पते पर कई शेल कंपनियां बने होने की जानकारी मिली। इनमें दो शेल कंपनियां संस्कार इंटरप्राइजेज और बुएयांस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में उन्होंने अपनी अवैध कमाई को विभिन्न माध्यमों से जमा कराया। पुनः उक्त राशि को चेन ट्रांसफर माध्यम से अपने एवं अपनी पत्नी के खाते में प्राप्त किया।
अनुभूति के पूर्वी चंपारण और सहरसा में पदस्थापन के दौरान संस्कार इंटरप्राइजेज में बड़ी रकम जमा की गई, जो पुन: नलिनी प्रकाश के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी गई। ईओ की पत्नी के नाम पर लखनऊ के गोमतीनगर स्थित पते पर नलिनी क्रिएशन के नाम से एक आर्ट स्टूडियो का भी पता चला है।
छापेमारी में अनुभूति श्रीवास्तव के सीवान, पटना एवं लखनऊ आवास की साज-सज्जा काफी खर्चीली पाई गई है। ईओयू के स्तर पर इसकी इन्वेट्री (सूची) तैयार कर खर्च का आकलन किया जा रहा है। तलाशी में लखनऊ स्थित आवास से 1.92 लाख नकद एवं लगभग 400 ग्राम ज्वेलरी, सीवान आवास से 1.25 लाख रुपये नकद और पटना स्थित घर से 3.49 लाख रुपये नकद सहित कुल 6,66,500 रुपये बरामद हुए।
मालूम हो कि अनुभूति श्रीवास्तव ने 2013 में बिहार सरकार के नगर विकास विभाग में योगदान दिया था। 2021 में भी स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई की थी। ईओयू अधिकारियों के मुताबिक कार्यपालक पदाधिकारी पर आय से करीब 79 फीसदी अधिक संपत्ति जमा करने का मामला दर्ज किया गया था। लेकिन, छापामारी में बरामद दस्तावेजों व उनसे मिले चल-अचल संपत्तियों के ब्योरों को देखते हुए इसका प्रतिशत काफी ज्यादा बढ़ने की संभावना है।




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