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SIR In Bihar: बिहार में साथ-साथ चले एसआईआर और तकरार, जानें कब-कब क्या हुआ

SIR In Bihar: अंतिम सूची प्रकाशन के बाद भी कांग्रेस सहित कई दलों ने विरोध जारी रखने का एलान किया है। बिहार में अब बूथवार इसकी समीक्षा में दल जुट गए हैं। कांग्रेस ने तो कार्यकर्ताओं सहित आम लोगों से बिहार की सूची का मूल्यांकन करने की अपील की है।

Wed, 1 Oct 2025 07:51 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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SIR In Bihar: बिहार में साथ-साथ चले एसआईआर और तकरार, जानें कब-कब क्या हुआ

SIR In Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने 22 साल के लंबे अंतराल के बाद बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान चलाया। एसआईआर की अवधि कम रखे जाने और मतदाता पहचान के प्रमाणपत्र को लेकर आयोग को विपक्ष का कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा। 25 जून 2025 से एसआईआर की शुरुआत के बाद एसआईआर और विपक्ष की तकरार साथ-साथ चली। विपक्ष का यह विरोध पटना उच्च न्यायालय से होते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा।

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन मतदाता सूची अद्यतन करते समय लोगों से लिये जाने वाले प्रमाणपत्र में आधार कार्ड को वैध दस्तावेज मानने का निर्देश चुनाव आयोग को दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले से जुड़ी सुनवाई में यह भी कहा कि यदि बिहार एसआईआर में कोई कानूनी गड़बड़ी पाई जाती है तो कोर्ट इसे रद्द कर सकता है। अब बिहार में एसआईआर के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो गया है। चुनाव के ठीक पहले चली इस प्रक्रिया को विपक्षी दलों ने अपारदर्शी करार दिया।

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अंतिम सूची प्रकाशन के बाद भी कांग्रेस सहित कई दलों ने विरोध जारी रखने का एलान किया है। बिहार में अब बूथवार इसकी समीक्षा में दल जुट गए हैं। कांग्रेस ने तो कार्यकर्ताओं सहित आम लोगों से बिहार की सूची का मूल्यांकन करने की अपील की है। राजद ने कहा है कि आवश्यकता महसूस की गई तो उसकी शिकायत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष की जाएगी। यानी विपक्ष इस मुद्दे को अभी भी छोड़ने के मूड में नहीं है। बिहार में 24 जून को एसआईआर शुरू हुआ।

उसके बाद से ही विपक्ष इसकी प्रक्रिया और गरीबों के पास दस्तावेज की कमी का हवाला देकर इसे रोकने की मांग करता रहा। सड़क से संसद तक विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा। विपक्ष ने इसका नाम वोट चोरी तक दे दिया। शुरू में विपक्ष चुनाव आयोग से इस पर जवाब मांगता रहा। विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली और दिल्ली में चुनाव आयोग से मिला। ज्ञापन सौंपा। कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर आंदोलन का रुख अख्तियार किया।

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चुनाव आयोग ने कब क्या-क्या किया

25 जून 2025 : विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की जानकारी राजनीतिक दलों को दी गई

● 18/19 जुलाई 2025 : गणना पत्र न देने वाले मतदाताओं की सूची दलों से साझा की गई

● 21/22 जुलाई 2025 : बीएलओ-बीएलए की बैठक में अनुपस्थित, मृत एवं स्थानांतरित निर्वाचकों की सूची साझा की गयी

● एक अगस्त 2025 : मतदाता सूची का प्रकाशित प्रारूप राजनीतिक दलों से साझा किया गया

कब क्या-क्या हुआ-:

9 जुलाई को बिहार बंद

इसके बाद नौ विपक्षी दलों ने 7 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। नौ जुलाई को विपक्षी दलों ने बिहार बंद रखा। पटना के आयकर गोलंबर से शहीद स्मारक तक विरोध मार्च किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, भाकपा महासचिव डी राजा, भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, माकपा महासचिव एमी बेबी, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी सहित तमाम दलों के नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए।

संसद में भी विरोध प्रदर्शन

संसद की कार्रवाई के दौरान सरकार से जवाब मांगा। चर्चा की मांग की। चर्चा नहीं कराने पर 29 जुलाई को संसद भवन परिसर में तमाम विपक्षी दल के नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव में धांधली के आरोप लगाए।

17 अगस्त से 1 सितम्बर तक वोटर अधिकार यात्रा

राहुल गांधी के नेतृत्व में तेजस्वी यादव, दीपंकर भट्टाचार्य, मुकेश सहनी सहित महागठबंधन के सभी दलों के नेताओं ने 17 अगस्त से 1 सितंबर तक वोटर अधिकार यात्रा की। राज्य के 25 जिलों जिलों से होकर यात्रा गुजरी। 1300 किमी लंबे सफर के बाद 1 सितंबर को पटना में समाप्त हुई।

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