बिहार के इन 6 जिलों में बनेंगी भूकंपीय वेधशाला, 14 जिलों में भूकंप का सबसे ज्यादा खतरा
बिहार का बड़ा हिस्सा (लगभग 80 प्रतिशत) सिस्मिक जोन 4 और 5 (उच्च जोखिम) में आता है। इसी तरह सिस्मिक जोन-5 (उच्चतम जोखिम) वाले जिलों में किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया शामिल है।

देश में भूकंप का पता लगाने की क्षमता में सुधार के लिए 100 नयी भूकंपीय वेधशाला (सिस्मोलॉजिकल आब्जरवेट्री) की स्थापना की जाएगी। इनमें से छह केंद्र बिहार में प्रस्तावित हैं। इसमें कम तीव्रता वाले भूकंपों को पता लगाना संभव होगा और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी संबंधित विभागों तक कम से कम समय में सूचना पहुंचायी जा सकेगी। बिहार में पटना, पूर्णिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, रोहतास एवं औरंगाबाद में नयी वेधशाला स्थापित होगी।
वेधशाला में सिस्मिक पियर बनाया जायेगा, जहां सेंसर लगेंगे
लॉजिस्टिक सहायता के रूप में एक सुरक्षित सरकारी परिसर में 15-15 फीट के खाली भूखंड में भूकंपीय उपकरणों को रखने के लिए एक उपयुक्त संरचना बनाई जायेगी। भवन के अंदर एक सिस्मिक पियर बनाया जायेगा, जहां सेंसर लगाये जायेंगे। उपकरणों को विद्युत आपूर्ति के लिये वेधशाला भवन के ऊपर दो सौर पैनल (150 वाट) भी लगाये जायेंगे।
बिहार को पहले से ज्यादा खतरा, कई जिले अब जोन छह और पांच में
हिमालय के करीब और टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित होने के कारण भूकंप के लिहाज से बिहार अत्यधिक संवेदनशील है। बिहार का बड़ा हिस्सा (लगभग 80 प्रतिशत) सिस्मिक जोन 4 और 5 (उच्च जोखिम) में आता है। इसी तरह सिस्मिक जोन-5 (उच्चतम जोखिम) वाले जिलों में किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया शामिल है।




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