बिहार में दो दिन पर्यटन स्थलों की सैर करेंगे अफसर-कर्मी, सम्राट चौधरी सरकार का आदेश; RJD ने घेरा
सम्राट चौधरी सरकार के आदेश की राजद ने आलोचना की है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, ‘सरकार की नई पर्यटन नीति समझ से परे है। सरकार अपनी नाकामी खुद ही बता रही है कि बाहर के टुरिस्ट यहां आना नहीं चाहते हैं। भय का माहौल है। लॉ एंड ऑर्डर फेल है।’
बिहार सरकार के सभी अधिकारी और कर्मचारी सपरिवार प्रत्येक तीन माह पर दो दिन किसी पर्यटन स्थल पर प्रवास करेंगे। राज्य में सम्राट चौधरी सरकार के इस आदेश के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार के इस आदेश को लेकर कहा है कि सरकार अपनी नाकामी छिपाना चाहती है क्योंकि बाहर से लोग पर्यटन के लिए नहीं आ रहे हैं और ऐसे में सरकार अपने ही कर्मियों और अफसरों को सैर करवा रही है।
दरअसल राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने और उन स्थलों को विश्व पटल पर लाने के ख्याल से ‘बिहार दर्शन’ शुरू किया है। जिसके तहत एक सरकारी फरमान में कहा गया है कि अधिकारियों और कर्मियों को उनके गृह जिला को छोड़ अन्य जिले के पर्यटन स्थल पर शुक्रवार और शनिवार को जाना होगा। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर ने प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम, एसपी सहित सभी विभागीय प्रमुखों को दिशा निर्देश जारी किया है। सरकार का तर्क है कि इस पहल से बिहार का पर्यटन बढ़ेगा और बिहार की सभ्यता और संस्कृति को समझने का मौका भी मिलेगा।
आदेश में कहा गया है कि दो दिन (रात्रि सहित) पर्यटन स्थल पर बिताना होगा। आसपास के तीन स्थलों का भ्रमण और रात्रि विश्राम करना होगा। इस अवधि में वो समीक्षा बैठक या सरकारी कार्य नहीं करेंगे। भ्रमण के बाद फोटो, स्थल से जुड़ी जानकारी एवं अनुभव तथा सुझाव की समेकित रिपोर्ट डीएम, प्रमंडल में प्रमंडलीय आयुक्त और सचिवालय में विभागीय अधिकारी को देंगे। इस अवधि को कर्तव्य पर बिताई गई अवधि मानी जाएगी। रिपोर्ट को समेकित करने के लिए कार्यालय में नोडल अफसर नामित किए जाएंगे। पर्यटन विभाग, जिलाधिकारी और वन विभाग के अधिकारियों को पर्यटन स्थलों पर होम स्टे की सुविधा विकसित करने को कहा गया है।
राजद ने घेरा
सरकार के इस आदेश के बाद अब इसपर विवाद शुरू हो गया है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, 'सरकार की नई पर्यटन नीति समझ से परे है। सरकार अपनी नाकामी खुद ही बता रही है कि बाहर के टुरिस्ट यहां आना नहीं चाहते हैं। भय का माहौल है। लॉ एंड ऑर्डर फेल है। जब बाहर के लोग यहां आते तब टूरिस्ट प्लेस या जगहों पर जाते तो उसका विशेष महत्व होता। लेकिन अपने ही अधिकारियों को वो पर्यटक स्थल पर जाने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे तो कामकाज पर भी असर पड़ेगा।




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