Samrat choudhary government implement Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana in bihar farmers will get benefit सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार में लागू किया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों के लिए क्या है खास, Bihar Hindi News - Hindustan
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सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार में लागू किया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों के लिए क्या है खास

सम्राट चौधरी कैबिनेट ने बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने का फैसला लिया है। यह योजना  लागू होने के बाद अब रकबा की सीमा की खत्म हो गई है। जितनी भूमि में चाहें फसल बीमा करा सकते हैं।

Tue, 9 June 2026 06:06 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार में लागू किया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों के लिए क्या है खास

बिहार में इस वर्ष से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होगी। इसके साथ ही पहले से चली आ रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना को बंद कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में कुल 25 प्रस्तावों को हरी झंडी दी गयी। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि राज्य में रबी 2026-27 मौसम से केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को कार्यान्वित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। यह योजना राज्य में खरीफ 2018 मौसम से कार्यान्वित बिहार राज्य फसल सहायता योजना का स्थान लेगी।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों के कृषि लागत के समतुल्य फसल क्षति का भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही इस योजना के अंतर्गत बीमित भूमि की कोई अधिसीमा नहीं होने के कारण राज्य के बड़े जोत वाले किसानों को भी उनके बीमित भूमि के समतुल्य फसल क्षति का लाभ होगा। योजना इसी साल से लागू कर दी गयी है।

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किसानों के लिए क्यों खास है योजना

- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने के बाद अब रकबा की सीमा की खत्म हो गई है। जितनी भूमि में चाहें फसल बीमा करा सकते हैं।

- बुआई पूर्व से लेकर फसल कटाई के बाद हुए नुकसान की भरपाई होगी।

- किसानों को कुल प्रीमियर राशि में खरीफ के लिए डेढ़ प्रतिशत, रबी फसल के लिए दो और फल-सब्जी के लिए 5 फीसदी राशि देनी होगी।

- कुल प्रीमियर में किसानों की प्रीमियर राशि काटने के बाद केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर राशि बीमा कंपनियों को देगी।

- किसानों के लिए अनिवार्यता नहीं होगी, जो बीमा कराना चाहेंगे, उन्हें ही प्रीमियर राशि देनी होगी।

- फसल क्षति का आकलन और उपज अनुमान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा।

- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कृषि जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भू-मापी शुल्क दोगुना

कैबिनेट ने भूमि मापी शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब भूमि मापी के लिए दोगुना शुल्क चुकाना होगा। इसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नया शुल्क प्रभावी होगा। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा।

पहले यह राशि क्रमश: न्यूनतम एक हजार और अधिकतम चार हजार रुपए थी। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति खेसरा एक हजार तथा अधिकतम चार हजार रुपये होगा, जो पहले न्यूनतम 500 और अधिकतम दो हजार रुपये था। तत्काल मापी के लिए शहरी क्षेत्रों में प्रति खेसरा चार हजार तथा अधिकतम 16 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा दो हजार रुपये तथा अधिकतम आठ हजार रुपये शुल्क लिया जाएगा।

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