अंगभाषी सम्राट चौधरी का कोसी-सीमांचल से भी गहरा नाता, मुंगेर जिले से तीसरा मुख्यमंत्री बनने का मिला गौरव
Samrat Choudhary: सम्राट चौधरी का पूर्वी बिहार से गहरा लगाव है। भले ही वह तारापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं। लेकिन पिता शकुनी चौधरी के चुनाव प्रचार में उन्होंने भागलपुर, बांका और खगड़िया में जमकर प्रचार किया था। यही कारण है कि इन जिलों में सम्राट चौधरी के अच्छे समर्थक हैं।
Samrat Choudhary: बिहार में भाजपा को पहला मुख्यमंत्री पूर्वी बिहार से मिला है। अंगभाषी सम्राट को न सिर्फ पूर्वी बिहार बल्कि कोसी-सीमांचल भी अपना मानता है। हमभाषी होने के नाते सम्राट कोसी, सीमांचल को भी उतना ही कनेक्ट करते हैं, जितना पूर्वी बिहार को। बतौर उप मुख्यमंत्री वह राज्य के बाकी हिस्सों से तो जुड़े रहे ही हैं। इसके पहले पूर्वी बिहार से श्रीकृष्ण सिंह,चन्द्रशेखर सिंह और भागवत झा आजाद कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 1989 के बाद पूर्वी बिहार को पुन: सीएम की कुर्सी मिली है। सम्राट के नामित होने से पूर्वी बिहार में उत्साह का माहौल है। कोसी-सीमांचल भी गदगद है। सम्राट चौधरी पूर्वी बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड के लखनपुर के रहने वाले हैं। वर्तमान में सम्राट चौधरी तारापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इसके पूर्व वह खगड़िया के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। आजादी के बाद बिहार का पहला मुख्यमंत्री पूर्वी बिहार से श्रीकृष्ण सिंह बने थे। उनका जन्म तत्कालीन मुंगेर जिले के बरबीघा के मौर गांव में हुआ था। हालांकि अब यह शेखपुरा जिला के अन्तर्गत आ गया है। श्रीकृष्ण सिंह 24 सितम्बर 1952 से 31 जनवरी 1961 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। इसके पहले 20 जुलाई 1937 से 31 अक्टूबर 1939 तक और दो जनवरी 1946 से 31 जनवरी 1952 तक प्रीमियर रहे थे। इसके बाद पूर्वी बिहार से चन्द्रशेखर सिंह बिहार के मुख्यमंत्री रहे। चन्द्रशेखर सिंह 14 अगस्त 1983 से 12 मार्च 1985 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे।
बांका का सांसद रहते हुए कांग्रेस पार्टी ने चन्द्रशेखर सिंह को मुख्यमंत्री बनाया था। उनका जन्म जमुई जिले में हुआ था। हालांकि उन्होंने और उनकी पत्नी मनोरमा सिंह ने बांका लोकसभा क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया। चन्द्रशेखर सिंह के बाद पूर्वी बिहार से भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। उन्हें भी सांसद रहते हुए कांग्रेस ने सीएम बनने का मौका दिया था। भागवत झा आजाद का जन्म अविभाजित बिहार के गोड्डा जिले में हुआ था।
हालांकि उनकी राजनीतिक कर्मभूमि भागलपुर रही। भागवत झा आजाद ने भागलपुर लोकसभा सीट का 1962, 1967, 1971, 1980 और 1984 में प्रतिनिधित्व किया था। वह 14 फरवरी 1988 से 11मार्च 1989 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। इसके 37 साल बाद पूर्वी बिहार से सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला है। हालांकि इसके पहले सूबे के दोनों उपमुख्यमंत्री पूर्वी बिहार से ही थे। सीएम बनने जा रहे सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है।
बिहार का ऐसा जिला, जिसने तीन बार दिया मुख्यमंत्री
मुंगेर बिहार के मुंगेर जिले के लिए बुधवार, 15 अप्रैल 2026 का दिन इतिहास में स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज होने जा रहा है। सम्राट चौधरी की ताजपोशी के बाद मुंगेर ऐसा पहला जिला बन जायेगा, जिसने तीन बार बिहार को मुख्यमंत्री दिया है। मुंगेर का यह सफर 1937 में शुरू हुआ, जब डॉ. श्रीकृष्ण सिंह बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने। शेखपुरा के बरबीघा (तब मुंगेर जिला) में जन्मे श्रीबाबू ने लगभग 24 साल मुख्यमंत्री रहते हुए आधुनिक बिहार की नींव रखी।
जमींदारी उन्मूलन, राजेंद्र सेतु, बरौनी रिफाइनरी, सिंदरी खाद कारखाना जैसे ऐतिहासिक कामों से उन्होंने बिहार को नई दिशा दी। वे अपना पहला चुनाव 1952 में मुंगेर के हवेली खड़गपुर विधान सभा से जीते थे। इसके बाद वर्ष 1983 से 1985 तक कांग्रेस पार्टी के चंद्रशेखर बिहार के मुख्यमंत्री रहे। चंद्रशेखर जमुई के मल्लेपुर के रहने वाले थे, जो उस वक्त मुंगेर का हिस्सा हुआ करता था। वर्ष 1991 में जमुई मुंगेर से अलग हुआ।
सम्राट चौधरी के हैं अच्छे समर्थक
सम्राट चौधरी का पूर्वी बिहार से गहरा लगाव है। भले ही वह तारापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं। लेकिन पिता शकुनी चौधरी के चुनाव प्रचार में उन्होंने भागलपुर, बांका और खगड़िया में जमकर प्रचार किया था। यही कारण है कि इन जिलों में सम्राट चौधरी के अच्छे समर्थक हैं। सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी दो बार खगड़िया और भागलपुर तथा एक बार बांका लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं।




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