2 दिन बाकी, RJD का स्कोर 10; ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावा-आपत्ति में तेजस्वी फेल?
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को गरीबों का नाम काटने वाली साजिश बातकर यात्रा कर रहे तेजस्वी यादव की अपील के बावजूद राजद ने यह काम बंद होने से दो दिन पहले तक मात्र 10 दावा और आपत्ति चुनाव आयोग को सौंपा है। आखिरी तारीख 1 सितंबर है।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) को गरीब वोटरों का नाम काटने की साजिश बताकर राज्य की यात्रा कर रहे तेजस्वी यादव की खुली अपील के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की तरफ से अब तक मात्र 10 आपत्ति या दावा दाखिल किया गया है। कल यानी सोमवार (1 सितंबर) को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावा या आपत्ति का आखिरी दिन है। 25 अगस्त को तेजस्वी ने वीडियो संदेश से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि वो इस काम में जुटें और जिनका नाम गलत कटा है या जो नए वोटर बनने की उम्र के हो गए हैं, उनका नाम जुड़वाएं। अब तक 10 नाम ही आना उनकी अपील के बेअसर रहने और आरजेडी की नाकामी का सवाल पैदा कर रहा है।
तेजस्वी यादव की अपील के छह दिन बाद भी राजद का दावा और आपत्ति का स्कोर 10 पर अटका रहना गंभीर विषय है। ये सारे 10 केस नाम जुड़वाने के हैं। महागठबंधन में सीपीआई-एमएल ने 15 नाम जोड़ने और 103 नाम हटाने के लिए प्रक्रिया के तहत आवेदन दिया है। इन दोनों के अलावा सत्ता और विपक्ष के किसी भी दल ने कोई प्रपत्र दावा या आपत्ति का नहीं जमा किया है। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पटना में रविवार को आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने 89 लाख मामलों की शिकायत चुनाव आयोग से की है लेकिन वह कह रहा है कि शिकायत नहीं मिली है।
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सत्ता और विपक्ष के कुल 12 राष्ट्रीय और प्रांतीय दलों के 1 लाख 60 हजार 813 बूथ लेवल वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया में शामिल हैं। इस प्रक्रिया में इनका सबका कुल योगदान 128 मामले हैं। सत्ताधारी दलों ने सवाल नहीं उठाया था, इसलिए उनके स्कोर जीरो हैं तो समझा जा सकता है। लेकिन विपक्ष तो सुप्रीम कोर्ट गया है। अदालत से आधार लेने का आदेश भी मिल गया। फिर भी 65 लाख नाम कटने के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के तहत विपक्षी दलों द्वारा 128 मामले दर्ज कराना, विपक्ष के आरोप पर ही गंभीर सवाल खड़े करता है। राजद की तरफ से 28 अगस्त तक 3, फिर 29 अगस्त तक 9 और 30 अगस्त तक 10 मामले दर्ज कराए गए थे। 31 अगस्त को भी वह नंबर 10 पर टिका है।
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यह हाल तब है जब मतदातातओं ने खुद 31 अगस्त की सुबह 10 बजे तक 33326 नाम जोड़ने का दावा और 207565 नाम हटाने के लिए आपत्ति दी है। आयोग इसमें से 38342 मामलों का निपटारा कर चुका है। इसी तरह 18 साल की उम्र हासिल कर चुके 15 लाख 32 हजार 438 लोगों ने नाम जोड़ने का आवेदन दिया। आयोग 81 हजार से ऊपर केस निपटा चुका है।
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नाम गलत कटे या छूटे हैं तो उन्हें जुड़वाने के लिए मिले एक महीने के समय का क्या इस्तेमाल हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली तारीख पर विपक्षी दलों से पूछा था और शायद अगली सुनवाई में इस बात का हिसाब भी ले। 1 सितंबर की शाम जब दावा और आपत्ति का काम बंद होगा, तब भी वोटर अधिकार यात्रा निकालने वाले दलों और नेताओं के लिए यह सवाल बना रहेगा- नाम जुड़वाने के लिए क्या किया गया?




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