BJP में पार्टी के विलय से उपेंद्र कुशवाहा का इनकार, बोले- दुनिया की कोई ताकत...
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हम गठबंधन धर्म निभाने वाले लोग हैं। गठबंधन में जो सबसे बड़ी पार्टी है उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम लोग पूरी मजबूती के साथ एनडीए में थे, एनडीए में हैं और एनडीए में रहेंगे। इसमें डाउट नहीं होना चाहिए।’

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी का बीजेपी में विलय करने की अटकलों को खारिज किया है। रविवार को उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विलय का कोई सवाल ही नहीं खड़ा होता है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हम गठबंधन धर्म निभाने वाले लोग हैं। गठबंधन में जो सबसे बड़ी पार्टी है उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम लोग पूरी मजबूती के साथ एनडीए में थे, एनडीए में हैं और एनडीए में रहेंगे। इसमें किसी तरह का डाउट नहीं होना चाहिए।’
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, 'कई महीने पहले यह खबर चली कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा का विलय होने वाला है। कुछ मीडिया चैनलों में यह खबर चली और तारीख की भी घोषित कर दी गई थी। ऐसा कहा जा रहा था कि सब कुछ तय हो चुका है और महज औपचारिकता बाकी है। मगर ऐसा कुछ भी नहीं था।' उन्होंने कहा कि आप 100 प्रतिशत इस बात को लेकर आश्वस्त रहिए कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व किसी एक पद को लेकर खत्म नहीं होगा। दुनिया की कोई भी ताकत ऐसा नहीं कर सकती है।'
पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए क्या संदेश
रविवार को पार्टी के प्रदेश सम्मेलन के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि वह एनडीए का हिस्सा हैं और आगे भी बने रहेंगे। गौरतलब है कि विधान परिषद का टिकट बेटे को नहीं मिलने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘उपेंद्र कुशवाहा एक परिवार चलते हैं। एक पार्टी चलते हैं और आप सब लोग उसका हिस्सा हैं।’
क्या दीपक प्रकाश को छोड़ना पड़ेगा मंत्री पद?
बिहार में 18 जून को होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव से पहले एनडीए के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चा का केंद्र बिहार सरकार के मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश हैं, जिनका नाम एनडीए की ओर से घोषित एमएलसी उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मंत्री विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है। दीपक प्रकाश फिलहाल मंत्री हैं, इसलिए एमएलसी उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं होने से उनके मंत्री पद पर संकट की चर्चा तेज हो गई है।




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