नीतीश के अति पिछड़ा कोर वोट पर राहुल, तेजस्वी की चोट; महागठबंधन के EBC संकल्प में कौन से 10 वादे?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की नीतीश कुमार के कोर वोटबैंक अति पिछड़ा वर्ग पर नजर है। इस वर्ग को साधने के लिए महागठबंधन ने ईबीसी संकल्प के जरिए 10 बड़े वादे किए हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को पटना के होटल में अति पिछड़ा वर्ग से जुड़ा कार्यक्रम कर महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र का पहला हिस्सा ‘ईबीसी न्याय संकल्प’ के रूप में जारी किया। इसमें महागठबंधन के सत्ता में आने पर पंचायत एवं नगर निकायों में ईबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने और एससी-एसटी की तर्ज पर ईबीसी अत्याचार निवारण कानून बनाने जैसे कुल 10 अहम वादे किए गए हैं। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कोर वोटबैंक में महागठबंधन की सेंधमारी के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
2023 में जारी हुई जाति आधारित गणना की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में अति पिछड़ा वर्ग यानी ईबीसी की आबादी 36.01 प्रतिशत है। यानी कि यह कुल आबादी का एक तिहाई से भी ज्यादा है। इसलिए ईबीसी जातियां बिहार की चुनावी राजनीति में खासा महत्व रखती हैं। अति पिछड़ा वर्ग को सीएम नीतीश की जेडीयू का कोर वोटबैंक माना जाता रहा है। अब राहुल और तेजस्वी समेत महागठबंधन के अन्य नेता इस वर्ग को साधने के लिए खुलकर खेलने लगे हैं।
बिहार चुनाव 2025 के लिए बुधवार को जारी हुए अति पिछड़ा संकल्प में जो वादे किए गए हैं, उनमें सबसे पहला यह है कि सरकार में आने पर पंचायत और नगर निकायों में मौजूदा 20 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा। यह गौर करने वाली बात है कि 2005 में बिहार की सत्ता में आने पर नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा को पंचायत और निकायों में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इससे बिहार के सबसे बड़े वर्ग का जेडीयू पर भरोसा बढ़ गया और नीतीश लगभग दो दशक से सत्ता के शीर्ष पर बने हुए हैं।
महागठबंधन का 10 सूत्री ‘अति पिछड़ा न्याय संकल्प’ यहां देखें-
- अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम पारित किया जाएगा
- अति पिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत तथा नगर निकाय में वर्तमान 20% आरक्षण को बढ़ाकर 30% किया जाएगा
- आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा बढ़ाने को विधान मंडल से पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा
- नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में नॉट फाउंड सूटेबल (एनएफएस) जैसी अवधारणा को अवैध घोषित किया जाएगा
- अति पिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अति समावेशन (अंडर- और ओवर-इंक्लूजन) से संबंधित सभी मामलों को एक कमेटी बनाकर निष्पादित किया जाएगा
- अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के सभी आवासीय भूमिहीनों को शहरी क्षेत्रों में तीन डिसमिल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पांच डिसमिल आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाएगी
- यूपीए सरकार द्वारा पारित शिक्षा अधिकार अधिनियम-2010 के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन के लिए आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अति पिछड़ा, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए निर्धारित किया जाएगा
- 25 करोड़ तक के सरकारी ठेकों और आपूर्ति कार्यों में अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा
- संविधान की धारा 15 (5) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा
- आरक्षण की देखरेख के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा और जातियों की आरक्षण सूची में कोई भी परिवर्तन केवल विधान मंडल की अनुमति से ही संभव होगा।
पटना में ईबीसी संकल्प पत्र जारी करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा एनडीए सरकार ने अति पिछड़ों के लिए कुछ नहीं किया। वोट लिया और उपयोग कर फेंक दिया। अति पिछड़ों को दबाया जा रहा है। राहुल ने कहा कि हमारी गारंटी है कि जो वादे किए गए हैं उन पर जरूर अमल करेंगे




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