rabri devi and tejashwi yadav not come in tej pratap bhoj bihar politics over dahi chura तेजप्रताप के यहां राबड़ी-तेजस्वी नहीं आए पर लालू ने संतुलन साधा, बिहार में दही-चूड़ा वाली सियासत, Bihar Hindi News - Hindustan
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तेजप्रताप के यहां राबड़ी-तेजस्वी नहीं आए पर लालू ने संतुलन साधा, बिहार में दही-चूड़ा वाली सियासत

इस भोज में शामिल होकर लालू प्रसाद ने संतुलन साधने की कोशिश की। हालांकि राबड़ी देवी का नहीं आना चर्चा का विषय बना रहा। तेजस्वी यादव के तो आने की संभावना नहीं ही थी, लेकिन राबड़ी देवा के नहीं आने पर लोगों को आश्चर्य हुआ। तेजस्वी ने भी दूरी बनाए रखी।

Thu, 15 Jan 2026 06:41 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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तेजप्रताप के यहां राबड़ी-तेजस्वी नहीं आए पर लालू ने संतुलन साधा, बिहार में दही-चूड़ा वाली सियासत

बिहार में इस समय दही-चूड़ा भोज के बहाने सियासी समीकरण साधे जा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव और उसके परिणाम के बाद पहली बार राजनीतिक दलों के दिग्गजों का जुटान एक-दूसरे के यहां हो रहा है। वहां सियासी जोड़-घटाव जारी है। इस बार न केवल जदयू, भाजपा, कांग्रेस की ओर से भोज का आयोजन किया गया, बल्कि लालू प्रसाद के पुत्र तेजप्रताप यादव ने भी भोज का आयोजन कर इसमें छौंक लगा दिया।

जुबानी जंग ने कई बार दही की मिठास को खट्टा करने का प्रयास किया, लेकिन इन सबके बाद भी सियासी मिठास बनी रही। राजद की ओर से भोज का आयोजन नहीं किए जाने की भी खूब चर्चा हो रही है तो कई राजनीतिक दिग्गजों के इस बार भोज से दूरी बनाने को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव के भोज की रही।

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इस भोज में शामिल होकर लालू प्रसाद ने संतुलन साधने की कोशिश की। हालांकि राबड़ी देवी का नहीं आना चर्चा का विषय बना रहा। तेजस्वी यादव के तो आने की संभावना नहीं ही थी, लेकिन राबड़ी देवा के नहीं आने पर लोगों को आश्चर्य हुआ। तेजस्वी ने भी दूरी बनाए रखी। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, नीतीश सरकार के जदयू मंत्री अशोक चौधरी, विधायक चेतन आनंद के शामिल होने से भोज दिलचस्प हो गया।

हार के सदमे से नहीं उबर पाया राजद

बिहार चुनाव में हार के बाद राजद सदमे से नहीं उबर पाया है। यही कारण है कि हमेशा चर्चा में रहने वाले राजद सुप्रीमो के दही-चूड़ा भोज की इस बार कमी खली। वहीं, कांग्रेस ने बुलंद हौसले के साथ सदाकत आश्रम में भोज का आयोजन किया। इसमें पार्टी के एक भी विधायक नहीं पहुंचे। इससे कयासों का दौर शुरू हो गया। पार्टी में टूट की चर्चा शुरू हो गयी, लेकिन पार्टी के हौसले पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा।

सुशील मोदी की कमी खली

दही-चूड़ा के भोज के दौर में दिवंगत सुशील मोदी के मकर संक्रांति के भोज को भी खूब याद किया गया। इसी तरह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव के भोज को भी याद किया। लोगों को उनकी भी कमी खली।

विजय सिन्हा के यहां सीएम समेत तमाम दिग्गज पहुंचे थे

मंगलवार को उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने भोज दिया था। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर भाजपा और जदयू के तमाम बड़े नेता शामिल हुए। भोज के बहाने जमकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। बुधवार को जदयू विधायक रत्नेश सदा ने भी भोज का आयोजन किया। इसमें नीतीश कुमार के अलावा जदयू के तमाम बड़े नेता और मंत्री शामिल हुए। इसे जदयू का भोज बताकर प्रचारित किया गया। बुधवार को ही भाजपा दफ्तर में भोज हुआ। इसमें पार्टी के सारे दिग्गज शामिल हुए।

उधर, अपने भोज के लिए हमेशा चर्चा में रहे भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से भी शुक्रवार को भोज का आयोजन है। अनुमान में तो इसे पहले ही सुपरहिट बताया जा रहा है। कई लोग तो अभी से इस भोज का खाका खींचने में जुट गए हैं। इस सियासी भोज का विस्तार बुधवार को दिल्ली तक हो गया। नितिन नवीन सांसद राधामोहन सिंह के आवास पर आयोजित भोज में शामिल हुए तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार पूर्वांचल मोर्चा के दफ्तर पहुंच गए। वहां उन्होंने भोज में शिरकत की।

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