Delhi high court did not give stay order in IRCTC scam case against lalu prasad and tejashwi yadav IRCTC घोटाले में लालू-तेजस्वी को झटका, मुकदमे पर रोक से दिल्ली HC का इनकार, Bihar Hindi News - Hindustan
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IRCTC घोटाले में लालू-तेजस्वी को झटका, मुकदमे पर रोक से दिल्ली HC का इनकार

IRCTC Scam: लालू प्रसाद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि गवाहों की जांच के बाद, ट्रायल कोर्ट गवाहों से जिरह की कार्यवाही शुरू करेगा। इस पर हाईकोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि मुख्य जांच होने दीजिए। मैं स्थगन आदेश नहीं दे रही हूं।

Thu, 15 Jan 2026 06:34 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, नई दिल्ली/पटना
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IRCTC घोटाले में लालू-तेजस्वी को झटका, मुकदमे पर रोक से दिल्ली HC का इनकार

IRCTC Scam: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ चल रहे मुकदमे पर रोक नहीं लगाएगा। अदालत ने हालांकि कहा कि अधीनस्थ अदालत अगले से अगले सप्ताह गवाहों से जिरह कर सकती है, तब तक वह मामले में आरोप तय करने के अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ पिता-पुत्र की याचिकाओं पर फैसला कर लेगी।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि पिछली बार अदालत ने आरोप तय करने के खिलाफ वर्तमान याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान मुकदमे पर रोक लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के लिए आज का दिन निर्धारित किया था। उन्होंने कहा कि गवाहों की जांच के बाद अधीनस्थ अदालत गवाहों से जिरह की कार्यवाही शुरू करेगी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, “मुख्य जांच होने दीजिए। मैं उन पर रोक नहीं लगा रही हूं।’’ उन्होंने आगे कहा कि वह रोक के मुद्दे पर पहले फैसला करने के बजाय अगले सप्ताह इस मामले पर अंतिम फैसला करेंगी।

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याचिकाओं पर जल्द फैसला सुनाने का संकेत देते हुए, अदालत ने सीबीआई के वकील से कहा कि वह अगले सप्ताह जिरह पर जोर नहीं दें। अदालत ने कहा, ‘‘अगले से अगले सप्ताह जिरह शुरू करें और मैं इस बीच बहस समाप्त करके आदेश सुना दूंगी।’’ अदालत ने आगे कहा, ‘‘जिरह पर जोर न दें। आप जिनसे चाहें, पूछताछ कर सकते हैं।’’

अधीनस्थ अदालत ने 13 अक्टूबर, 2025 को लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कथित धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के अपराधों के लिए आरोप तय किए थे।

अधीनस्थ अदालत ने यह तीखी टिप्पणी की थी कि इस मामले में जमीन और शेयरों का लेन-देन ‘‘संभवतः रांची और पुरी में रेलवे के होटलों में निजी भागीदारी हासिल करने की आड़ में पनपे साठगांठ वाले पूंजीवाद का एक उदाहरण है।’’ लालू ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

याचिका में कहा गया, “पूरे आरोपपत्र के कागजात देखने से स्पष्ट है कि सीबीआई ने न तो कोई दस्तावेजी या मौखिक सबूत पेश किया है, न ही किसी गवाह का बयान दर्ज किया है, और न ही परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से यह साबित कर पाई है कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच अपराध करने का कोई समझौता हुआ था।’’

याचिका में कहा गया, ‘‘रिकॉर्ड में एक भी ऐसा दस्तावेज नहीं रखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता हो कि याचिकाकर्ता की आईआरसीटीसी में तैनात किसी भी अधिकारी के साथ निविदा प्रक्रिया में धांधली करने के लिए कोई बैठक हुई या वैचारिक सहमति बनी थी, क्योंकि उपरोक्त नोट कथित तौर पर भारतीय रेलवे में तैनात अधिकारियों द्वारा जारी किए गए थे।

लालू यादव के अलावा, अदालत ने प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(घ)(2) और (3) के तहत आरोप तय किए हैं। धारा 13 (2) लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार के लिए दंड का प्रावधान करती है, और धारा 13(1)(घ)(2) और (3) लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग करके लाभ प्राप्त करने से संबंधित हैं।

अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय करने का भी निर्देश दिया था।

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