शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या में बिहार के बक्सर से 2 अरेस्ट, गाड़ी झारखंड से बंगाल पहुंचाने का आरोप
पुलिस सूत्रों के मुताबिक हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग थे। हमलावरों ने रथ को निशाना बनाने से पहले रेकी की थी। जांच में यह बात सामने आई कि जिस कार का इस्तेमाल हमलावरों द्वारा किया गया, वह हत्या से पहले बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में पुलिस ने बक्सर से दो और अयोध्या से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। बंगाल पुलिस ने टोल प्लाजा पर किए गए डिजिटल भुगतान की जांच के बाद तीनों को गिरफ्तार किया। मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बक्सर से जबकि बलिया निवासी राज सिंह को अयोध्या से गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ की गई। तीनों को उत्तरी 24 परगना की अदालत में पेश करने के बाद 13 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य को पुलिस ने बक्सर के पीसी कॉलेज के पास से गिरफ्तार किया।
दोनों पर हत्या में इस्तेमाल वाहन को झारखंड से बंगाल तक पहुंचाने का आरोप है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग थे। हमलावरों ने रथ को निशाना बनाने से पहले रेकी की थी। जांच में यह बात सामने आई कि जिस कार का इस्तेमाल हमलावरों द्वारा किया गया, वह हत्या से पहले बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी। कार में सवार लोगों में से एक ने यूपीआई लेनदेन के माध्यम से टोल का भुगतान किया था।
विशाल श्रीवास्तव से पुलिस ने की पूछताछ
पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले बक्सर के विशाल श्रीवास्तव को पकड़ा था। पुलिस टीम विशाल श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। उस पर चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद दोनों युवकों को संरक्षण व आश्रय उपलब्ध कराने का शक है। विशाल पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस ने बक्सर से जिन दो युवकों को गिरफ्तार किया है, उनकी इस हत्या में सीधी भूमिका नहीं थी। यह दोनों युवक जिस कार से बंगाल गए थे, उसका इस्तेमाल हत्या के दौरान किया गया।
इसी एसयूवी से ओवरटेक कर चंद्रनाथ का रास्ता रोका गया, जिसके बाद कुछ युवकों ने उन पर गोलियों की बरसात कर दी। पश्चिम बंगाल पुलिस को हत्या के दौरान इन युवकों के मौके पर होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। हत्या की यह घटना छह मई की रात पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम (उत्तर 24 परगना) इलाके में हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों युवकों को धनबाद बुलाया गया था। फिर धनबाद से एक चार पहिया गाड़ी लेकर दोनों बंगाल गए थे। बंगाल में एक टोल प्लाजा पर इन युवकों ने ऑनलाइन भुगतान किया था।
तकनीकी अनुसंधान में लगी बंगाल पुलिस को इससे बहुत बड़ा सुराग मिल गया और अपराधियों तक पहुंचने का रास्ता आसान हो गया। इसी कड़ी को खंगालते हुए बंगाल पुलिस आरोपितों तक पहुंची और उनको गिरफ्तार किया। आरोपितों ने पुलिस को बताया कि झारखंड से बंगाल पहुंचने पर सहयोगियों ने उनकी गाड़ी रख ली और दोनों को वापस ट्रेन से झारखंड भेज दिया।
छिप कर रह रहे थे दोनों युवक
हत्या के बाद यह दोनों युवक छुपकर रह रहे थे। विशाल श्रीवास्तव ने दोनों युवकों को छिपने में मदद की। बंगाल पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले विशाल को पकड़ा था। फिर मुफस्सिल थाने में दर्ज दूसरे मामले में पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने मुकदमे के आईओ को फटकार लगाते हुए विशाल को जमानत दे दी। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने रथ पर हमला करके सिल्वर कार छोड़ दी और एक लाल कार व बाइक से फरार हो गए थे।
वहीं हमले में इस्तेमाल हथियार ऑस्ट्रिया में बनी ‘ग्लॉक 47 एक्स’ पिस्टल थी, जो एक अत्याधुनिक हथियार है और भारत में आपराधिक मामलों में कम ही देखा जाता है। भारत में ग्लॉक पिस्टल आसानी से उपलब्ध नहीं होती है। ऐसे में यह यह जांच का विषय है कि इस अपराध में अंतरराष्ट्रीय लिंक तो नहीं है। चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या के लिए अपराधियों ने लंबी साजिश रची थी। हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पेशवेर गिरोह की तरह तैयारी की गई थी। हत्या में शामिल आरोपियों ने गाड़ियों की नंबर प्लेट बदली, चेसिस नंबर घिसे और विदेशी हथियारों का इंतजाम किया, पर अब दबोचे गए।




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