Pitru Paksha 2025: गांधी मैदान में टेंट सिटी, भोजन-भजन का भी इंतजाम; गयाजी में पितृपक्ष महासंगम
Pitru Paksha 2025: गयाजी में तीर्थयात्रियों के ठहरने से लेकर पिंडदान और पूजा-पाठ के लिए इस बार कई विशेष इंतजाम किये गये हैं। गांधी मैदान में बनी टेंट सिटी में पिंडदानियों के ठहरने और भोजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम व भजन संध्या की भी व्यवस्था है।

Pitru Paksha 2025: विष्णु नगरी गया जी में पितृपक्ष महासंगम-2025 का आगाज शनिवार की शाम हो गया। पितरों के मोक्ष की कामना लिये देश-विदेश से पिंडदानियों का आगमन शुरू हो गया है। 17 दिनी पिंडदान करने वालों ने शनिवार को पटना जिले के पुनपुन घाट पर तर्पण कर पूर्वजों को मोक्ष दिलाने की कामना की। पुनपुन नहीं जाने वाले तीर्थयात्रियों ने गया जी शहर के गोदावरी तालाब में कर्मकांड शुरू किया। रविवार को तीर्थयात्री फल्गु में स्नान और तर्पण कर देवघाट पर पिंडदान के बाद गजाधर विष्णु और विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में स्थित विष्णुचरण का दर्शन-पूजन करेंगे।
विष्णुपद परिसर में शनिवार शाम राज्य सरकार के मंत्रियों प्रेम कुमार, डॉ सुनील कुमार, संजय सरावगी और राजू कुमार सिंह समेत अन्य ने पितृपक्ष मेला का औपचारिक उदघाटन किया। गया जी में तीर्थयात्रियों के ठहरने से लेकर पिंडदान और पूजा-पाठ के लिए इस बार कई विशेष इंतजाम किये गये हैं। गांधी मैदान में बनी टेंट सिटी में पिंडदानियों के ठहरने और भोजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम व भजन संध्या की भी व्यवस्था है। पिंडदान ऐप के माध्यम से पिंडदानी सीधे अधिकारी से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
भीड़ नियंत्रण के लिए बड़ी संख्या में दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात किये गये हैं। इस बार थ्रैस वोट से फल्गु नदी की सफाई की जा रही है। रबर घाट पर स्थायी पंडाल बनाया गया है। विष्णुपद मंदिर के पास महावीर ट्रस्ट की ओर से विष्णु रसोई की व्यवस्था की गई है। पिछले साल करीब 22 लाख पिंडदानी गया जी आए थे। गयापाल महेश लाल गुपुत का कहना है कि कई राज्यों में बाढ़ के कारण पिंडदानियों की संख्या में कमी हो सकती है। पहले दिन करीब 40 हजार पिंडदानियों के पहुंचने से रौनक बढ़ गई है। गया जी में बिहार और दूसरे राज्यों के अलावा रूस, श्रीलंका, नेपाल, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, केन्या, मॉरीशस आदि कई देशों से पिंडदानी हर साल आते हैं।
आज फल्गु में तर्पण, खीर के पिंड से पिंडदान
त्रिपाक्षिक पिंडदानी करने वाले पिंडदानी पुनपुन के बाद गया जी में भाद्रपद पूर्णिमा रविवार को फल्गु में तर्पण कर खीर के पिंड से पिंडदान शुरू करेंगे। दूसरे दिन यानी आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को प्रेतशिला, ब्रह्मकुंड, रामशिला, काकबली में पिंडदान करेंगे। आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या यानी 21 सितंबर को अक्षयवट में पिंडदान करेंगे। 17 दिन वाले 22 सितंबर यानी आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गायत्री घाट पर नाना-नानी के पिंडदान व गयापाल से सुफल लेने के साथ त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध संपन्नन करेंगे।
पुनपुन : पितृपक्ष मेला शुरू, देश-विदेश से पहुंचे पिंडदानी
पुनपुन नदी घाट पर अंतरराष्ट्रीय पितृपक्ष मेला शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन लगभग दो हजार लोगों ने पिंडदान किया। हैदराबाद, राजस्थान, कोलकाता और नेपाल से लोग पिंडदान करने पुनपुन नदी घाट पहुंचे हैं। पुनपुन नदी घाट पर पहला पिंडदान करने के बाद सभी श्रद्धालु गयाजी के लिए चले गए। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम अपने पिता दशरथ जी का पिंडदान करने भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ पुनपुन नदी पर पहला पिंडदान करने पहुंचे थे। उसके बाद गयाजी में दूसरा पिंडदान किया था। तभी से सैकड़ों की संख्या में लोग अपने पितरों के पहला पिंडदान करने पुनपुन नदी घाट पहुंचते हैं।




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