Patna shootout Chandan Mishra was once terror in Buxar many murders with Sheru पटना शूटआउट: बक्सर में कभी चंदन मिश्रा का था आतंक, शेरू के साथ किए थे कई मर्डर, Bihar Hindi News - Hindustan
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पटना शूटआउट: बक्सर में कभी चंदन मिश्रा का था आतंक, शेरू के साथ किए थे कई मर्डर

पटना के पारस अस्पताल में गुरुवार को हुए शूटआउट में पैरोल पर बाहर आए अपराधी चंदन मिश्रा की हत्या कर दी गई। चंदन का एक समय बक्सर में आतंक था, लोग उसके नाम से खौफ खाते थे। गैंगस्टर शेरू के साथ मिलकर उसने कई मर्डर किए थे।

Thu, 17 July 2025 11:02 PMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान संवाददाता, बक्सर
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पटना शूटआउट: बक्सर में कभी चंदन मिश्रा का था आतंक, शेरू के साथ किए थे कई मर्डर

पटना के पारस हॉस्पीटल में गुरुवार को अपराधियों के हाथों मारे गए गैंगस्टर चंदन मिश्रा का बक्सर में कभी आतंक रहा था। एक समय अपराध की दुनिया में उसकी तूती बोलती थी। डेढ़ दशक पहले क्षेत्र में उसका नाम ही काफी था। बक्सर और भोजपुर पुलिस की नींद हराम कर चुके चंदन पर कई मुकदमे दर्ज हैं। उसने कुख्यात शेरू सिंह के साथ मिलकर कई लोगों को मौत के घाट उतारा था। साल 2011 शेरू और चंदन का नाम हिट लिस्ट में था। इन दोनों ने साथ मिलकर ताबड़तोड़ मर्डर किए थे। इससे पुलिस की नींद हराम हो गई थी। उस समय 19-20 लाल के इन लड़कों को पकड़ने के लिए पुलिस ने एड़ी-चोटी का पसीना एक कर दिया था।

बक्सर के मेन रोड स्थित भोजपुर चूना भंडार के मालिक राजेंद्र केसरी की हत्या में कुख्यात शेरू सिंह के साथ चंदन मिश्रा का नाम सामने आया था। 2011 के अगस्त महीने में केसरी की हत्या हुई थी। उनके बेटे से रंगदारी मांगी गई थी और धमकी दी गई थी कि पैसे नहीं दिए तो हत्या कर दी जाएगी। ऐसे में वह डर गया था। तब केसरी ने कहा कि वे ही दुकान पर बैठेंगे। जो आएगा, देखेंगे। इसी बीच उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में शेरू और चंदन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इसी मामले में चंदन मिश्रा आजीवन कारावास की सजा काट रहा था।

14 साल बाद आया था जेल से बाहर

चंदन मिश्रा करीब 14 सालों तक विभिन्न जेलों में बंद रहा। वह फिलहाल पटना के बेऊर जेल में था। करीब 14 साल बाद वह पैरोल पर जेल से बाहर आया था। दरअसल, उसे अपना ऑपरेशन कराना था। इसी के लिए अदालत ने उसे पंद्रह दिनों का पैरोल दिया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते 3 जुलाई को वह बाहर आया था। इसके बाद उसने पारस हॉस्पीटल में अपना इलाज शुरु कराया।

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डॉक्टरों ने बीते बुधवार को उसका ऑपरेशन भी कर दिया था। उसके पैरोल की अवधि 18 जुलाई यानी आज समाप्त होने वाली थी। हालांकि उसका ऑपरेशन बीते बुधवार को ही हुआ था। ऐसे में उसे उम्मीद थी कि उसे बाहर रहने की कुछ और मोहलत मिल जाएगी। इसी बीच गुरुवार को उसकी हत्या कर दी गई।

मां-बाप का इकलौता चिराग था चंदन, छोटी उम्र में हथियार उठाया

गैंगस्टर चंदन मिश्रा बक्सर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के सोनवर्षा गांव का रहने वाला था। उसके पिता श्रीकांत मिश्र उर्फ मंटू मिश्र पंचायत के मुखिया रह चुके हैं। चंदन अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। उसका पालन-पोषण बड़े ही लाड़-प्यार से हुआ था। हालांकि बालिग होने से पहले ही वह रास्ता भटक गया और अपराध की दुनिया से नाता जोड़ बैठा।

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जरायम की दुनिया से चंदन मिश्र का नाता कम उम्र में ही जुड़ गया था। उसने किशोरावस्था में ही अपने गांव के ही एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने उसे पकड़कर बाल सुधार गृह भेजा था। इसके बाद तो चंदन पूरी तरह अपराध के रास्ते पर चल पड़ा। बहुत कम उम्र में पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया।

आरा और बक्सर में दर्ज हैं 25 मुकदमे

चंदन मिश्रा का आपराधिक इतिहास बताता है कि वह करीब पांच सालों तक पूरी शिद्दत से सक्रिय रहा। उसके खिलाफ आरा और बक्सर के विभिन्न थानों में 25 मुकदमे दर्ज हैं। ये सभी मुकदमे वर्ष 2011 से 2016 के बीच दर्ज किए गए हैं। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार चंदन के खिलाफ बक्सर के टाउन थाना में सबसे ज्यादा 14 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं औद्योगिक और डुमरांव में 4-4, मुफस्सिल में 2 और आरा के नवादा थाना में 1 मुकदमा दर्ज है। हालांकि, जेल जाने के बाद उसने अपराध की दुनिया से दूरी बना ली थी। बीते कुछ सालों से उसका किसी भी आपराधिक घटना में नाम नहीं आया।

ऐसे पकड़े गए थे चंदन और शेरू

करीब 14 साल पहले 2011 में दो नवयुवक शेरू और चंदन ने पूरे जिले के साथ आस-पास के इलाके में आंतक मचा दिया था। खुलेआम चुनौती देकर हत्या करना उनका शगल बन गया। पुलिस व प्रशासन की नाक में दम कर रखा था दोनों ने। व्यवसायियों सहित आम जनता के बीच उनके नाम का खौफ कुछ ज्यादा ही हावी हो गया। दोनों चंदन मिश्रा व ओंकार सिंह उर्फ शेरू सिंह पक्के मित्र थे। हालांकि समय के साथ इनकी गहरी दोस्ती में दरार आने लगी थी।

दोनों को गिरफ्तार करने के लिए आरा व बक्सर के तत्कालीन एसपी एमआर नायक व दलजीत सिंह ने संयुक्त टीम गठित की थी। टीम ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया था। उनका पीछा लगातार पुलिस कर रही थी। बावजूद दोनों पुलिस को छका रहे थे। अंत में पुलिस को लोकेशन मिली कि वह नेपाल के वीरगंज इलाके में है। पुलिस वहां धमकी। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय मुद्दा होने के कारण पुलिस बातचीत व कागजी दांव-पेंच में उलझकर रह गई थी। तभी, दोनों काठमांडू से आगे दूसरे इलाके में निकल गए, जहां से पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा था। हालांकि बाद में इनकी गिरफ्तारी कोलकाता से हुई थी।

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