पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का जमीन अधिग्रहण 100 दिन में पूरा होगा, टेंडर भी जल्द
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे राजधानी के पास वैशाली जिले के सराय से शुरू होकर पूर्णिया में डगरूआ के पास बिस्वासपुर तक खत्म होगा। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम 100 दिन में पूरा हो जाएगा और टेंडर भी जल्द निकल जाएगा।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम 100 दिनों में पूरा हो जाएगा। वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया के डीएम ने मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा के साथ बैठक में यह जानकारी दी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इसी अवधि में टेंडर भी जारी कर देगा। मुख्य सचिव ने बुधवार को प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की बैठक की। इसमें बिहार में प्रस्तावित विभिन्न हाइवे प्रोजेक्ट की समीक्षा की गई।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे की शुरुआत सराय (वैशाली) से होगी। पटना रिंग रोड के उत्तरी हिस्से को इसमें शामिल किया जाएगा। शेरपुर-दिघवारा को इसमें शामिल करने की कवायद चल रही है। पूर्णिया में यह एनएच 27 के विश्वासपुर में समाप्त होगा। अब इसके विस्तार पर सहमति बनी है। आगे इस एक्सप्रेस-वे का जुड़ाव पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से भी होगा।
इस 6 लेन एक्सप्रेस-वे की वित्तीय मंजूरी (पीपीपीएसी) इसी महीने मिल जाएगी। सोमवार को दिल्ली में हुई बैठक में एनएचएआई अध्यक्ष ने बिहार को इस बात पर आश्वस्त किया है। बैठक में यह सहमति भी बनी है कि पटना-पूर्णिया का विस्तार दिघवारा तक होगा। इसके तहत गंडक नदी पर एक पुल भी बनेगा। तब इसका संपर्क पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से हो जाएगा। इसके माध्यम से लोग पूर्णिया से गोरखपुर होते हुए दिल्ली तक आराम से आ-जा सकेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस वे के जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही काफी तेजी से चल रही है। इसी तरह उत्तर बिहार में पड़ने वाले रक्सौल-हल्दिया एवं सिलीगुड़ी-गोरखपुर के लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। दोनों परियोजनाओं के एलाइनमेंट की मंजूरी मिल चुकी है।
इसी तरह बिक्रमशिला से कटरिया तक गंगा नदी पर नए पुल निर्माण की योजना की निविदा प्राप्त हो गई है। इसका जल्द ही शिलान्यास होगा। एनएचएआई द्वारा राज्य में 2015 से लेकर अब तक 68 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गयी है, जिनमें 21 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 47 में कार्य जारी है एवं नई 21 परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। एनएचएआई की कुल परियोजनाओं की लागत 2.20 लाख करोड़ रुपये है, जिनमें 38 हजार करोड़ रुपये का खर्च हो चुका है।




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