patna high court said FIR on breathe analyzer report in sarabbandi law is illegal सिर्फ ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट पर शराबबंदी के तहत दर्ज FIR अवैध, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला, Bihar Hindi News - Hindustan
More

सिर्फ ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट पर शराबबंदी के तहत दर्ज FIR अवैध, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

  • कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर मशीन की रिपोर्ट का समर्थन किसी प्राथमिकी में दर्ज हुई आरोपित के असामान्य व्यवहार जैसे लड़खड़ाती जबान या चढ़ी हुई आंख जैसे हालात से समर्थित होनी चाहिए या उसके खून और पेशाब जांच की रिपोर्ट जो इस बात की पुष्टि करे कि आरोपित के शरीर में अल्कोहल की मात्रा है।

Tue, 18 Feb 2025 07:19 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, विधि संवाददाता, पटना
share
सिर्फ ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट पर शराबबंदी के तहत दर्ज FIR अवैध, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया है कि शराबबंदी कानून के तहत केवल ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई प्राथमिकी अवैध है। कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर मशीन की रिपोर्ट किसी व्यक्ति के मद्यपान करने का कोई ठोस प्रमाण नहीं देता, इसलिए केवल सांस की दुर्गंध जांच कर दर्ज हुई प्राथमिकी शराबबंदी कानून में अमान्य होगी।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की एकलपीठ ने नरेंद्र कुमार राम की अपराधिक वृत याचिका को मंजूर करते हुए उसके खिलाफ किशनगंज उत्पाद थाने में पिछले वर्ष दर्ज हुई प्राथमिकी (कांड संख्या 559/2024) को निरस्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर मशीन की रिपोर्ट का समर्थन किसी प्राथमिकी में दर्ज हुई आरोपित के असामान्य व्यवहार जैसे लड़खड़ाती जबान या चढ़ी हुई आंख जैसे हालात से समर्थित होनी चाहिए या उसके खून और पेशाब जांच की रिपोर्ट जो इस बात की पुष्टि करे कि आरोपित के शरीर में अल्कोहल की मात्रा है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बिना टिकट स्टेशन पर एंट्री नहीं, मजिस्ट्रेट तैनात; 35 स्टेशनों पर सुरक्षा टाइट
read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ट्रेनों में यात्रियों का रेला, 20 गुना बढ़ी टिकटों की बिक्री; बेटिकट सफर भी जारी

तभी वैसी प्राथमिकी शराबबंदी कानून के तहत मान्य होगी। याचिकाकर्ता के वकील शिवेश सिन्हा ने पांच दशक पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानून सांस की दुर्गंध को पेट में शराब रहने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मानती, जब तक उसके खून पेशाब या उसके असामान्य व्यवहार उक्त रिपोर्ट को समर्थित करती हो। याचिकाकर्ता पेट के संक्रमण का इलाज होमियोपैथी दवाओं से करीब एक पखवाड़े से कर रहा था।

ब्रेथ एनालाइजर ने होमियोपैथी दवाओं में अल्कोहल की मात्राओं को संवेदन कर पेट में शराब होने की रिपोर्ट दी। अधिकारियों ने आरोपित के खून और पेशाब की जांच कराए बगैर ही प्राथमिकी दर्ज कर दी, जिसमें याचिकाकर्ता के असामान्य व्यवहार या उसकी चढ़ी हुई आंख बगैर का जिक्र भी नहीं है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:नक्सल प्रभावित इलाके में कॉलेज, अस्पताल और स्टेडियम, कैमूर में CM नीतीश
read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:खुशखबरी! बगहा से आरा के बीच नारायणी-गंगा कॉरिडोर, गंडक नदी पर पुल का भी प्लान
लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।