बिहार में मोहर्रम जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा लहराता दिखा युवक, पहचान में जुटी पुलिस
हालांकि, अखाड़ा के साथ स्थानीय थाना की पुलिस भी साथ चल रही था लेकिन इस ओर किसी का भी ध्यान नही गया था। बताया जाता है जब अखाड़ा में चल रहे लोगो को इस बात की जानकारी हुई तो उक्त युवक को खूब डांट-फटकार किया गया लेकिन तब तक उक्त वीडियो सोशल मीडिया में वारयल हो चुका था।

रविवार को मुहर्रम के 10वी तारीख को बिहार के जमुई जिले में शहर के विभिन्न मोहल्ला से मुहर्रम का अखाड़ा निकाला गया था। वही मुहर्रम के एक अखाड़ा में एक युवक के हाथ मे फिलिस्तीन का भी झंडा देखा गया था जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है। बताया जाता है कि उक्त अखाड़ा शहर के भछियार मोहल्ला का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा गया कि एक युवक फिलिस्तीन का झंडा लेकर अखाड़ा में चल रहा है।
हालांकि, अखाड़ा के साथ स्थानीय थाना की पुलिस भी साथ चल रही था लेकिन इस ओर किसी का भी ध्यान नही गया था। बताया जाता है जब अखाड़ा में चल रहे लोगो को इस बात की जानकारी हुई तो उक्त युवक को खूब डांट-फटकार किया गया लेकिन तब तक उक्त वीडियो सोशल मीडिया में वारयल हो चुका था। हालांकि, लाइव हिन्दुस्तान इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
जमुई के भछियार मोहल्ले से निकले जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा फहराने की खबर चर्चा का विषय बन गया। झंडा थाना चौक के पास लहराया गया, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ है। सूचना मिलते हैं लोगों ने झंडा फहरा रहे युवक को बाहर निकाला। एसडीपीओ सतीश सुमन ने बताया कि वीडियो के आधार पर युवक की पहचान में जुटी है।
बता दें कि इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर के विभिन्न मोहल्ले में सिपल व ताजिया के साथ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाला। इस दौरान शहर के थाना चौक, महिसौड़ी सहित कई स्थानों से अखाड़ा निकाला गया जो शहर के निर्धारित मार्ग होते हुए गंतव्य स्थान पर जाकर समाप्त हो गया। इस दौरान विभिन्न अखाड़ों के खलीफा के नेतृत्व शहर के विभिन्न स्थानों पर मुस्लिमों ने युद्ध के साजो-समान, लाठी, भाला, तलवार, बाणा आदि के साथ महिसौड़ी चौक, खैरा मोड़, थाना चौक आदि स्थानों पर करता दिखाई दिया।
उत्साही युवकों के द्वार बारी-बारी से सिपल घुमाया गया जबकि इमाम हुसैन के शहादत पर कई गीत भी गाये गये। उक्त कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। वही अधिकांश लोगों ने नवमीं और दसवीं का रोजा रख और देर शाम रोजा खोला। इस दौरान विधि-व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए पुलिस बल हर चौक-चौराहे पर तैनात थे जबकि अखाड़ा के साथ भी कई पुलिस पदाधिकारी साथ चल रहे थे।




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