नर्स की पढ़ाई के दौरान शादी बैन का आदेश रद्द, सोशल मीडिया पर बवाल के बाद हरकत में प्रशासन
दरअसल, 16 अप्रैल को स्कूल की प्राचार्य के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि कोई नर्स पढ़ाई के दौरान शादी करती है तो नामांकन तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। आदेश की प्रति स्कूल परिसर की दीवारों पर भी चस्पा कर दी गई थी।

बिहार के गोपलगंज जिले में नर्स की पढ़ाई के दौरान लड़कियों के शादी नहीं करने का फरमान काफी चर्चा में रहा। अब इस आदेश के खिलाफ ऐक्शन हुआ है और इसे रद्द कर दिया गया है। गोपलगंज के हथुआ अनुमंडल परिसर स्थित एक जीएनएम स्कूल प्रशासन के इस आदेश के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी हंगामा मचा था। इस आदेश में कहा गया था कि नर्स अपनी ट्रेनिंग या पढ़ाई अवधि के दौरान शादी नहीं कर सकती हैं।
दरअसल, 16 अप्रैल को स्कूल की प्राचार्य के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि कोई नर्स पढ़ाई के दौरान शादी करती है तो नामांकन तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। आदेश की प्रति स्कूल परिसर की दीवारों पर भी चस्पा कर दी गई थी।
प्रशासन ने क्या तर्क दिया था
अपने फरमान को लेकर स्कूल प्रशासन ने तर्क दिया था कि नर्सिंग की पढ़ाई हॉस्टल आधारित होती है और नर्सें परिसर में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं। ऐसे में प्रशिक्षण अवधि के दौरान शादी करने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। यह नियम पहले से है। इसे सख्ती से पालन कराने के आदेश दिए गए हैं। प्राचार्य मानसी सिंह ने कहा था कि यह कोई नया नियम नहीं है। नामांकन के समय ही उनसे एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराया जाता है, जिसमें यह शर्त होती है कि वह तीन वर्षों की पढ़ाई के दौरान शादी नहीं करेंगी।
सिविल सर्जन ने रद्द किया आदेश
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आदेश की आलोचना की थी और ट्रेनी नर्सों के परिजनों ने इसपर सवाल उठाया था। जिसके बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ। सिविल सर्जन डॉक्टर वीरेंद्र प्रसाद ने इसपर ऐक्शन लिया और इस फरमान को तुरंत रद्द कर दियाा। इसी के साथ जीएनएम स्कूल की प्राचार्य मानसी सिंह से सिविल सर्जन ने इस आदेश पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। सिविल सर्जन ने कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं देने पर प्राचार्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसडीओ के नेतृत्व में एक टीम का भी गठन किया गया है।




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