Nitish Kumar party JDU MLA Anant Singh demands to remove Liquor ban in Bihar बिहार में नीतीश के हटते ही शराब का शोर; जेडीयू विधायक अनंत सिंह भी बैन के नुकसान गिनाने लगे, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार में नीतीश के हटते ही शराब का शोर; जेडीयू विधायक अनंत सिंह भी बैन के नुकसान गिनाने लगे

अनंत सिंह ने शराबबंदी कानून को समाप्त कर शराब की बिक्री को चालू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि शहर से लेकर गांव तक लोग शराब पी रहे हैं।

Fri, 17 April 2026 01:52 PMSudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार में नीतीश के हटते ही शराब का शोर; जेडीयू विधायक अनंत सिंह भी बैन के नुकसान गिनाने लगे

नीतीश कुमार के सीएम पद से हटते ही शराबबंदी कानून पर शोर मचने लगा है। सरकार में शामिल दलों के विधायक ही बिहार को शराबबंदी से होने वाले नुकसान गिनाने लगे हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद के बाद जदयू के विधायक अनंत सिंह ने भी शराबबंदी को समाप्त कर शराब की बिक्री को चालू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि शहर से लेकर गांव तक लोग शराब पी रहे हैं। इसलिए शराबबंदी कानून को हटाकर इसे चालू कर देना चाहिए।

अनंत सिंह ने कहा है कि जब बिहार में शराबंदी कानून को लाया गया था तब उससे समर्थन में था। कुछ दिन सब ठीक रहा। लेकिन, पीने वाले शराब पी ही रहे हैं। कोई रोड पर नहीं दिखता है पर छिपकर शराब पीने का काम चल रहा है। सही शराब नहीं मिलने से गलत सलत नशा करके वे बीमार हो रहे हैं। सरकार शराब की बिक्री को चालू कर दे और पीकर सड़क पर चलने वालों को जेल में बंद करे। इससे राज्य को होने वाला राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा। उन्होंने कहा है कि सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर शराबबंदी हटाने को लेकर बात करेंगे क्योंकि इससे राज्य को नुकसान और धंधेबाजों को लाभ हो रहा है। पहले भी अनंत सिंह शराब चालू करने की मांग कर चुके हैं।

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इससे पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक आनंद माधव ने गुरुवार को सीएम से मिलने के बाद कहा था कि शराबबंदी के बहुत नुकसान हो रहा है। शराब को बंद करने से अधिक लोगों को जागरुक होने की जरूरत है। दस सालों तक राज्य में शराबबंदी लागू रहा। इससे गलत लोगों को फायदा हुआ। राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है।

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उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए।

शराबबंदी कानून को समाप्त करने की वकालत दबी जुबान में केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी भी कई बार कर चुके हैं। वे अक्सर कहते हैं कि इस कानून से गरीबों का काफी नुकसान हुआ। बड़े लोग महंगी शराब खरीद कर पीते हैं और गरीब आदम गलत दारू पीने से मर जाता है। गरीब तबके के लाखों लोग जेलों में बंद हैं। सरकार को इस कानून की समीक्षा करना चाहिए।

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