बिहार में फ्री बिजली के बाद अब 58 लाख गरीबों के छत पर मुफ्त सोलर प्लांट, बजट में ऐलान
पटना जैसे शहर में भूमिगत तार बिछाये जा रहे हैं। गांव से लेकर शहर तक 22-24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। 8752 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड सप्लाई की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9600 मेगावाट बिजली खपत होने का अनुमान है।

पिछले वर्ष जुलाई से सवा सौ यूनिट फ्री बिजली दे रही सरकार अब गरीबों के घरों की छतों पर मुफ्त सोलर रूफटॉप लगाएगी। ऊर्जा विभाग ने 58 लाख गरीब बिजली उपभोक्ताओं की छतों पर 1.1 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का निर्णय लिया है। पहले चरण में 10 लाख लोगों के घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। अगले पांच वर्षों में सरकारी भवनों पर 500 मेगावाट का सोलर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जाएंगे।
मंगलवार को ऊर्जा सह वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बिहार बजट पेश करते हुए यह घोषणा की। उनके अनुसार, बिहार में आर्थिक विकास के साथ बिजली की मांग में भी लगातार बढ़ी है। दो दशक पहले सात सौ मेगावाट बिजली की खपत थी। अब 12 गुना से अधिक 8752 मेगावाट खपत हो रही है। बिजली के क्षेत्र में सरकार ने चरणबद्ध तरीके से काम किया। बिहार का अपना कोई बिजली घर नहीं था। इसलिए सबसे पहले बिजली घर निर्माण की योजना पर काम हुआ।
बरौनी, कांटी, नवीनगर, कजरा, पीरपैंती, चौसा में बिजली घर का निर्माण हुआ। इसके बाद संचरण तार बिछाने की कार्ययोजना पर काम शुरू हुआ। वर्ष 2005 में बिहार 45 ग्रिड थे, जो अब 175 है। 16 ग्रिड बन रहे हैं। उस समय के पांच हजार सर्किट किमी संचरण तार आज 21 हजार 165 सर्किट किलोमीटर हो चुका है। 2369 सर्किट किमी संचरण तार बिछाने की प्रक्रिया चल रही है। राज्य के सभी इच्छुक लोगों को बिजली कनेक्शन दिये गए।
गली-मोहल्ले में बिजली के तार बिछाए गए। हादसों को कम करने के लिए भीड़भाड़ वाले इलाकों में कवर्ड तार लगाए गए। पटना जैसे शहर में भूमिगत तार बिछाये जा रहे हैं। गांव से लेकर शहर तक 22-24 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। 8752 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड सप्लाई की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9600 मेगावाट बिजली खपत होने का अनुमान है। मीटर रीडिंग व स्पॉट बिलिंग के कारण बिल में गड़बड़ियां कम हुई हैं।




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