कुनकी हाथी के डर से भाग कर नवादा पहुंच रहे गजराज
नवादा जिले के जंगलों में हाथियों की लगातार मूवमेंट ने आमलोगों और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग ने हाथियों को झारखंड की सीमा में धकेलने की कोशिश की, लेकिन हाथी बार-बार वापस लौट आते हैं। पिछले महीने झारखंड में हाथियों ने कई लोगों की जान ले ली थी, जिसके चलते कर्नाटक से प्रशिक्षित हाथियों को बुलाया गया है।

नवादा जिले के सीमावर्ती जंगलों में हाथियों की लगातार मूवमेंट परेशानी का सबब बना है। जिससे आमलोगों के साथ-साथ वन विभाग की चिंता बढ़ी हुई है। तकरीबन 25 दिनों से जिले में हाथियों की मूवमेंट बनी हुई है। इस बीच वन विभाग द्वारा रेस्क्यू कर कई बार हाथियों को झारखंड के जंगलों में कोडरमा सीमा में धकेला गया। परंतु हाथी बार-बार वापस लौट आये। नवादा वन विभाग के लिए यह नया ट्रेंड है। इससे पूर्व हाथियों के आने पर उन्हें वापस कोडरमा सेंचुरी में भेज दिया जाता था। जहां वे अपने समूह के अन्य हाथियों से मिल जाते थे और फिर वे उनके साथ रह जाते थे।
जल्दी वापस नहीं लौटते थे। परंतु इस बार स्थिति ठीक विपरीत है। उन्हें रात में झारखंड की सीमा में छोड़ा जाता है और सुबह ही वे वापस नवादा की सीमा में आ जाते हैं। बताया जाता है कि पिछले महीने झारखंड में मतवाले हाथियों पर नियंत्रण के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित छह कुनकी/कुमकी हाथियों को कर्नाटक से लाया गया है। इन्हें रांची से कोडरमा के बीच के जंगलों में रखा गया है। जनवरी के महीने में झारखंड में कई लोगों की हाथियों ने जान ले ली थी। इसके बाद वहां की सरकार ने हाथियों पर काबू के लिए इन्हें कर्नाटक से खास तौर पर बुलाया है। ये हाथी आम हाथियों की तुलना में अधिक शक्तिशाली व विशालकाय होते हैं। प्रशिक्षित होने के कारण ये हाथियों को खदेड़ने में दक्ष होते हैं। इनकी कद-काठी के कारण आम हाथी इनसे डरते हैं और इन्हें देखते ही भागने लगते हैं। ऐसे में यह आशंका जतायी जा रही है कि ये हाथी कुनकी के डर से बार-बार नवादा के जंगलों में वापस आ जा रहे हैं। गोविन्दपुर, रजौली व कौआकोल में मूवमेंट नवादा के जंगलों में पश्चिम बंगाल की बांकुड़ा टीम पिछले 15 दिनों से अधिक समय से कैम्प कर रही है। बांकुड़ा टीम कई बार हाथियों के झुंड को झारखंड की सीमा में छोड़कर आयी। जहां से ये अगले ही दिन वापस लौट आये। हाथियों की मूवमेंट वर्तमान में रजौली के अलावा गोविन्दपुर व कौआकोल में है। रजौली के चितरकोली व धमनी इलाके में हाथियों के मूवमेंट से दहशत बनी है। 26 में से 24 हाथियों के झुंड को एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में गोविन्दपुर के माधोपुर से 10/11 अप्रैल की रात झारखंड की सीमा से सटे रजौली के झरेकी-तेलमो-करनपुर के जंगलों में छोड़कर आयी थी। जहां से ये वापस चितरकोली व आसपास घूम रहे हैं। वहीं गोविन्दपुर के माधोपुर में इस झुंड से बिछड़े दो हाथी (गर्भवती हथिनी व उसका बच्चा) अभी भी रह रहे हैं। लोगों का हुजूम देखकर व उनका शोर सुनकर दोनों हाथी वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। जबकि दो हाथी कौआकोल के सेखोदेवरा में भी देखे जा रहे हैं। ये कोडरमा जंगल से उतरते हैं और वापस फिर कोडरमा सीमा में चले जाते हैं। इन तीनों जगहों पर हाथियों की मूवमेंट से दहशत बरकरार है। बता दें कि पिछले दिनों नवादा में हाथी तीन जानें ले चुका है। इनमें रजौली में एक युवक व एक मवेशी तथा गोविन्दपुर के माधोपुर में एक महिला शामिल हैं। वर्जन 26 हाथियों के झुंड से दो हाथी माधोपुर में ग्रामीण इलाके के पास हैं। जिन्हें वहां से निकालकर रजौली में इनके साथियों से मिलाना प्राथमिकता है। वन विभाग इसके लिए काम कर रहा है। लोगों को समझा-बुझा कर शांत किया जा रहा है। ताकि दोनों को निकाला जा सके। इसके बाद रजौली से हाथियों के झुंड को झारखंड भेजा जाएगा। कुमकी हाथी के कारण इन हाथियों के बार-बार वापस नवादा के जंगलों में लौटने से इनकार नहीं किया जा सकता है। ------- श्रेष्ठ कुमार कृष्णा, वन प्रमंडल पदाधिकारी नवादा। (नवादा से अरविंद कुमार रवि)
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन