एक परसेंट वोटर का भी नाम कटा तो 7.90 लाख मतदाता... तेजस्वी ने फिर चुनाव आयोग को घेरा
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बार फिर से चुनाव आयोग को घेरा है। उन्होने कहा कि बिहार 7.90 करोड़ वोटर हैं। अगर एक फीसदी मतदाताओं का भी नाम कट गया तो 7 लाख 90 हजार वोटर का नाम कट जाएगा। यानी हर विधानसभा 3251 वोटर। जो 2020 में 35 सीटों पर जीत-हार का यह अंतर था।

बिहार में जारी मतदाता पुनरीक्षण के मसले पर महागठबंधन ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। रविवार को अपने सरकारी आवास एक पोलो रोड में पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार में 7 करोड़ 90 लाख मतदाता हैं। अगर एक फीसदी वोटर्स का भी नाम कट जाए तो सात लाख 90 हजार मतदाताओं का नाम कट जाएगा। यानी हर विधानसभा में 3 हजार 251 मतदाताओं का नाम कट जाएगा। उन्होने कहा कि 2020 में 35 सीटों पर जीत-हार का यह अंतर था। एक विधानसभा में औसतन 320 बूथ हैं। अगर एक बूथ पर 10 का नाम कटे तो 3200 मतदाताओं का नाम कटेगा। और यह बिहार के नतीजों पर अंतर डालेगा।
तेजस्वी ने आरोप लगाया है कि आयोग हमारी शंकाओं का समाधान नहीं कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने लचीलापन कार्यशैली अपनाने को कहा लेकिन उस पर भी अमल नहीं किया गया। फॉर्म शहर-गांव में फेकें जा रहे हैं। लोगों की जानकारी के बगैर आधा-अधूरा फॉर्म अपलोड किए जा रहे हैं। पावती रसीद नहीं मिलने से नाम कटने पर मतदाता कोई दावा नहीं कर सकेंगे। वहीं इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने कहा कि चुनाव आयोग का रवैया लोकतंत्र विरोधी है और मतदाताओं के अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है।
इससे पहले शनिवार को महागठबंधन की बैठक में ये निर्णय लिया गया था कि बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के मसले पर गठबंधन के सभी घटक दलों के नेता गांव-गांव और बूथ स्तर पर जाकर लोगों को मतदाता सूची पुनरीक्षण की वास्तविकता से अवगत कराएंगे। साथ ही महागठबंधन कुछ और नए लोकलुभावन वादे घोषणा पत्र में शामिल कर सकता है। बैठक में महागठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का वह दावा गलत है, जिसमें 74 फीसदी फॉर्म जमा करने की बात कही जा रही है। महागठबंधन नेताओं का कहना था कि एनडीए सरकार डर गई है।




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