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सड़क पर बिजली के खंभों से हादसों का डर, रोज जाम से जूझ रहा शहर

मुजफ्फरपुर में बिजली के खंभों के कारण स्मार्ट ट्रैफिक का सपना दम तोड़ रहा है। खंभे सड़क पर खड़े होकर जाम और हादसों का सबब बन रहे हैं। लोगों ने इन खंभों को जल्द शिफ्ट करने की मांग की है, जबकि जिम्मेदारों की लापरवाही से स्थिति और बिगड़ रही है।

Tue, 9 June 2026 06:25 PMNewswrap हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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सड़क पर बिजली के खंभों से हादसों का डर, रोज जाम से जूझ रहा शहर

मुजफ्फरपुर। शहर में बिजली के खंभों की वजह से स्मार्ट ट्रैफिक का सपना दम तोड़ रहा है। कई प्रमुख चौराहों और बाजारों में सड़क के बीचोंबीच या किनारे से चार से आठ फीट आगे बढ़ाकर बिजली व स्ट्रीट लाइट के पोल गाड़े गए हैं। ये न केवल जाम की सबसे बड़ी वजह बन गए हैं, बल्कि आए दिन हादसों का सबब बन रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रमंडलीय आयुक्त से लेकर जिलाधिकारी तक के आदेश के बाद भी बिजली कंपनी और नगर निगम की लापरवाही से सड़कों पर खंभों का जाल जस का तस है। जिम्मेदारों की सुस्ती का खामियाजा जाम और हादसों के रूप में आम लोग भुगत रहे हैं। लोगों ने बिजली के इन खंभों की जल्द से जल्द शिफ्टिंग की मांग की है।

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शहर में ट्रैफिक का दबाव

शहर में ट्रैफिक का सबसे ज्यादा दबाव झेलने वाले सिकंदरपुर चौक पर बीच सड़क पर बिजली का पोल खड़ा है। यहां हर दिन सुबह-शाम भीषण जाम लगता है। महिला थाना के पीछे ब्रह्मणटोली मोड़ पर भी सड़क के बीचोंबीच बिजली का खंभा गड़ा है, जहां से मुड़ना मुश्किल हो जाता है। नई बाजार मस्जिद चौक और पानी टंकी चौक पर भी बीच सड़क पर खड़े खंभे वाहनों की रफ्तार को रोक रहे हैं। सबसे बदतर स्थिति छोटी कल्याणी से अमर सिनेमा चौक तक की सड़क पर है। यहां सड़क किनारे से 4 से 5 फीट आगे बढ़ाकर बिजली के खंभों की पूरी लाइन खड़ी कर दी गई है। इससे सड़क की चौड़ाई सिकुड़ गई है। सड़क के बीच में डिवाइडर तो है ही, साथ ही दोनों किनारों से 7 से 8 फीट सड़क की तरफ बढ़ाकर पोल लगा दिए गए हैं। यानी दोनों तरफ से सड़क 15 फीट से ज्यादा संकरी हो गई। गोला रोड की बात करें तो यहां मुख्य मार्ग पर किनारे से 5 फीट सड़क की ओर हटाकर पोल लगाए गए हैं। मोतीझील, पंकज मार्केट रोड और गोला बाजार में भी यही तस्वीर दिखती है। आधा दर्जन से ज्यादा प्रमुख चौराहों पर बीच सड़क पर बिजली के खंभे खड़े हैं।

बिजली विभाग का बहाना

बिजली विभाग के इंजीनियर का बहाना है कि कई मार्गों में नाले के बाद जगह ही नहीं बचती, इसलिए मजबूरी में पोल सड़क की तरफ लगाने पड़ते हैं। जबकि, लोगों का कहना है कि नगर निगम से समन्वय कर चरणबद्ध तरीके से पोल लगाए जाएं तो सुधार संभव है। नगर निगम में अतिक्रमण हटाओ अभियान दल बना है। ये टीम पोल की आड़ में लगाई गई दुकानों को हटा देते हैं, लेकिन अतिक्रमण की मूल वजह पोल के लिए कोई कार्रवाई नहीं होती। अतिक्रमण हटाओ टीम के अधिकारी इसके लिए बिजली विभाग के इंजीनियर को पत्र भी जारी नहीं कर रहे हैं। इंजीनियर और ठेकेदारों से कभी पूछताछ नहीं होती है कि बिजली के खंभे सड़क पर लगाने की अनुमति किस विभाग से ली गई है। ट्रैफिक पुलिस जाम की वजह गलत तरीके से लगे पोल को मानती है, लेकिन इसपर कार्रवाई को अपनी जिम्मेवारी नहीं मानती।

पोल की आड़ में दुकानों के अवैध कब्जे से लगता जाम

छोटी कल्याणी के संजीव गुप्ता, वार्ड सात के कवींद्र सिंह, उदयशंकर पांडेय, अरुण कुमार ने कहा कि बिजली के इन खंभों ने फुटपाथी दुकानदारों को सड़क पर कब्जा जमाने का बहाना दे दिया है। छोटी कल्याणी से अमर सिनेमा चौक तक किनारे से आगे बढ़ाकर लगाए गए खंभों की आड़ में सब्जी, फल और अन्य सामान बेचने वालों ने पूरी फुटपाथ के साथ सड़क का हिस्सा भी घेर लिया है। क्लब रोड पर पानी टंकी चौक से मिठनपुरा तक पोल और डिवाइडर के बीच बची जगह पर दुकानें सज जाती हैं। खरीदारी करने वाले ग्राहक अपनी बाइक और कार सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं। नतीजतन, दो लेन की सड़क पर एक वाहन के निकलने की जगह भी नहीं बचती। सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक यहां रेंग-रेंग कर ट्रैफिक चलता है। गोला के मुख्य मार्ग पर स्थिति और खराब है। यहां 5 फीट सड़क पर लगे पोल की आड़ में दुकानदार अपनी दुकान का सामान निकालकर सड़क पर सजा देते हैं। इससे नाले के ऊपर और सड़क दोनों पर दुकानदारों का कब्जा हो गया है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बचा ही नहीं। मोतीझील में भी बैंक रोड से लेकर हरिसभा चौक तक पोल के सहारे दुकानें चल रही हैं।

हादसों का खतरा

राहगीरों ने बताया कि सड़क के बीच और अचानक किनारे से आगे निकले बिजली के पोल हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं। खासकर रात के समय स्ट्रीट लाइट खराब होने पर या बारिश में बिजली के इन खंभों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। पिछले एक साल में सिकंदरपुर चौक, ब्रह्मणटोली मोड़ और पानी टंकी चौक पर पोल से टकराकर आधा दर्जन से ज्यादा बाइक सवार घायल हो चुके हैं। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, कई छोटे-बड़े हादसों की वजह सड़क पर गलत तरीके से लगे पोल हैं। शहरी इलाके में इस साल पोल से गाड़ियों और बाइक की टक्कर के 20 से अधिक हादसे हो चुके हैं। ऑटो और ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि सवारी को बचाने के चक्कर में कई बार पोल से गाड़ी टकराते-टकराते बचती है। नए ड्राइवरों के लिए तो ये पोल किसी खतरे से कम नहीं।

त्योहारों में और बढ़ेगी लोगों की परेशानी

श्रावणी मेला आने वाला है। इसके बाद दुर्गापूजा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार हैं। इन मौकों पर शहर की सड़कों पर भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। त्योहारों के मौकों पर पोल के कारण परेशानी बढ़ जाती है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है। अघोरिया बाजार के व्यवसायी शिवशंकर साह कहते हैं कि रोज 20 मिनट का रास्ता एक घंटे में तय होता है। ग्राहक जाम के डर से दुकान पर आना कम कर दिए हैं। प्रशासन को सिर्फ बैठक नहीं, जमीन पर काम करना होगा। वार्ड पार्षद केपी पप्पू ने कहा ब्रह्मणटोली मोड़ पर पोल के कारण हर दिन गाड़ियां फंसती हैं। अब देखना यह है कि इस बार प्रशासन के आदेश फाइल से निकलकर सड़क पर कितना असर दिखाते हैं, या फिर मुजफ्फरपुर की जनता बिजली के पोल और जाम के बीच यूं ही पिसती रहेगी। फिलहाल तो शहर की सड़कें खंभों के जंगल में तब्दील हो चुकी हैं, जहां से निकलना किसी जंग लड़ने से कम नहीं।

रसूखदारों के दबाव में शिफ्टिंग के दौरान खेल

स्थानीय लोगों और राहगीरों का आरोप गंभीर है। उनका कहना है कि बिजली के पोल शिफ्ट करने या नया पोल लगाने वाली एजेंसी स्थानीय दुकानदारों और रसूखदार लोगों के प्रभाव में काम करती है। नियम यह है कि सड़क और नाले के निर्माण के बाद उसकी सीमा से बाहर पोल लगाए जाएं, लेकिन होता उल्टा है। दुकानदार अपनी दुकान के सामने पोल नहीं लगने देते, क्योंकि इससे उनकी दुकान का फ्रंट लुक प्रभावित होता है और बोर्ड लगाने की जगह नहीं बचती। रसूखदार लोग अपने घर या कॉम्प्लेक्स के सामने पोल लगाने से मना कर देते हैं। नतीजा, ठेकेदार नाला और सड़क की सीमा छोड़कर 4-5 फीट सड़क पर आगे बढ़कर पोल गाड़ देते हैं। गोला रोड के एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पोल लगाने वाले पहले पूछते हैं कि कहां लगाएं। अगर हम मना कर दें तो वो 2 फीट आगे सड़क पर लगा देते हैं।

आदेश पर आदेश, पर जमीन पर जीरो काम

बीबीगंज निवासी रीतेंद्र प्रकाश शर्मा, आलोक कुमार और उपेंद्र कुमार ने बताया कि सड़क पर बेतरतीब बिजली के पोल का मुद्दा नया नहीं है। पिछले तीन साल में दर्जनभर से ज्यादा प्रशासनिक बैठकों में यह मामला उठ चुका है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए हुई बैठकों में हर बार बिजली के पोल हटाने पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, डीएम ने 2024 में ही नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को सड़क से पोल हटाकर किनारे शिफ्ट करने का स्पष्ट आदेश दिया था। इसके बाद फिर से 2025 में नगर निगम और बिजली विभाग के साथ संयुक्त बैठक कर 60 दिन में सभी पोल व्यवस्थित करने को कहा था। ट्रैफिक थानेदार ने भी कई बार चिन्हित जगहों की सूची बिजली विभाग को सौंपी, लेकिन आदेश फाइलों से निकलकर सड़क तक नहीं पहुंचे।

अंडरग्राउंड हो बिजली के पोल

पूर्व मुखिया अफरोज आलम ने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में यूटिलिटी डक्ट का प्रावधान है। सभी बिजली और टेलीफोन के तार अंडरग्राउंड होने चाहिए। जब तक पोल जमीन के ऊपर रहेंगे, तब तक सड़कें चौड़ी नहीं होंगी। तत्काल सभी पोल को सड़क की सीमा से कम से कम 2 फीट पीछे शिफ्ट करना होगा। शहर के 20 सबसे क्रिटिकल पॉइंट चिन्हित कर वहां से युद्धस्तर पर पोल हटाए जाएं। दूसरा, नए पोल लगाने से पहले नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और बिजली विभाग की संयुक्त टीम साइट विजिट करे। तीसरा, पोल की आड़ में दुकान लगाने वालों पर भारी जुर्माना और सामान जब्ती की कार्रवाई हो।

बोले जिम्मेवार

कई मार्गों पर बिजली के पोल व अन्य अनुपयोगी खंभों को हटवाया गया है। पोल शिफ्टिंग का काम जटिल होता है। इसके कारण काफी देर तक शटडाउन रहता है। गर्मी के मौसम में इसके लिए बिजली शटडाउन होने से परेशानी होगी। सामान्य मौसम में पहले सड़क के बीच में लगे पोलों को शिफ्ट कराने के लिए बिजली विभाग के इंजीनियर से वार्ता की जाएगी।

-ऋतुराज प्रताप सिंह, नगर आयुक्त

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