पटना की सड़कों पर जब आतंकियों ने रोकी वैज्ञानिकों की बस, फिर कमांडोज ने जो किया; उसे देख सब रह गए दंग
पटना हाई-कोर्ट परिसर में शनिवार को एटीएस ने एक भव्य मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इसमें वैज्ञानिकों को बस सहित बंधक बनाने वाले आतंकियों को कमांडोज ने मार गिराया और बंधकों को सुरक्षित मुक्त कराया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार साहु की मौजूदगी में हुए इस अभ्यास में बम स्क्वायड और स्नाइपर्स…

Bihar News: शनिवार को बिहार की राजधानी पटना का हाई-कोर्ट परिसर गोलियों की तड़तड़ाहट और कमांडोज की गूंज से दहल उठा। राजगीर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे वैज्ञानिकों के एक दल को आतंकियों ने बस सहित बंधक बना लिया। आतंकियों ने वैज्ञानिकों की रिहाई के बदले सरकार के सामने कई बड़ी मांगें रख दीं। स्थिति तनावपूर्ण थी, लेकिन तभी बिहार पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) के जांबाज कमांडोज ने मोर्चा संभाला और एक सटीक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह वैज्ञानिकों को सुरक्षित छुड़ा लिया। दरअसल, यह कोई वास्तविक आतंकी हमला नहीं, बल्कि एटीएस द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय 'मॉक ड्रिल' का हिस्सा था।
मुख्य न्यायाधीश के सामने एटीएस का शक्ति प्रदर्शन
पटना हाई-कोर्ट परिसर में आयोजित इस मॉक ड्रिल के दौरान पटना हाई-कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार साहु समेत कई न्यायाधीश और पुलिस के वरीय अधिकारी मौजूद रहे। एटीएस के पेशेवरों ने समेकित रूप से कार्रवाई करते हुए न केवल आतंकियों को धूल चटाई, बल्कि वैज्ञानिकों को भी बिना किसी खरोंच के सुरक्षित निकाल लिया। मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रतीकात्मक अभ्यास सुरक्षा बलों की तत्परता और सटीकता को दर्शाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि देश में सुरक्षा और संरक्षण की भावना उत्पन्न करना हम सभी का संवैधानिक दायित्व है।
हिट, असॉल्ट और स्नाइपर्स की जुगलबंदी
एडीजी (एटीएस) पंकज दराद ने बताया कि इस ड्रिल को सफल बनाने के लिए एटीएस की अलग-अलग विशिष्ट टीमों ने हिस्सा लिया। इसमें 'हिट टीम', 'असॉल्ट टीम', 'डिसेप्शन टीम', 'बम स्क्वायड' और 'एंटी सबोटाज टीम' शामिल थीं। इसके अलावा, स्निफर डॉग्स और स्नाइपर्स ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एडीजी ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से हमारी टीमें किसी भी विषम परिस्थिति के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षा बलों का कौशल बढ़ाती है, बल्कि आम जनता के बीच भी विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करती है।
इस मॉक ड्रिल का आयोजन पटना हाई-कोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर करने का उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में सुरक्षा बलों के समन्वय और प्रतिक्रिया समय को जांचना था। बिहार पुलिस ने संदेश दिया है कि राज्य की सुरक्षा के लिए एटीएस जैसी विशिष्ट इकाइयां पूरी तरह मुस्तैद हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भले ही यह एक अभ्यास था, लेकिन इससे आम लोगों को यह भरोसा मिलता है कि संकट की स्थिति में पुलिस इसी तरह तत्परता से काम करेगी।




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