ओवैसी के तीसरे मोर्चे के प्लान को मायावती का झटका, बोलीं- बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी बसपा
महागठबंधन में शामिल होने की तमाम कोशिशों के बाद अब ओवैसी के थर्ड फ्रंट वाले प्लान को बसपा सुप्रीमो मायावती ने झटका दिया है। उन्होने कहा कि बीएसपी बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी। आपको बता दें 2020 में बसपा और ओवैसी की AIMIM तीसरे मोर्चे में शामिल थी।

बिहार चुनाव को लेकर महागठबंधन में शामिल होने की तमाम कोशिशों के नाकाम होने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने थर्ड फ्रंट बनाने का ऐलान किया है। तीसरे मोर्चे में कई दलों को शामिल करने की कवायद भी तेज कर दी गई है। हालांकि ओवैसी के तीसरे मोर्चे के प्लान को बीएसपी चीफ मायावती ने झटका दे दिया है। सोमवार को जारी बयान में मायावती ने कहा कि बिहार में उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। बसपा सभी 243 सीटों पर लड़ेगी।
आपको बता दें 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में मायावती की बसपा, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी जो अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा है, ओवैसी की एआईएमआईएम, वेंद्र प्रसाद यादव की एसजेडीडी, ओम प्रकाश राजभर की एसबीएसपी और संजय चौहान की जनवादी पार्टी ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट के तौर पर तीसरा मोर्चा बनाया था। तब मायावती की पार्टी ने ओवैसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।
जिसके चलते चर्चा थी, शायद इस बार भी मायावती की बसपा और ओवैसी की AIMIM तीसरे मोर्चे के तहत चुनाव लड़े। लेकिन बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने साफ कर दिया है, कि बिहार में बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी। जो थर्ड फ्रंट बनने से पहले ही ओवैसी के लिए झटका हो सकता है। बीते चुनाव में रालोसपा 104, बसपा 80, एआईएमआईएम 19, सुभासपा 5, जनवादी पार्टी 5 और एसजेडीडी 25 सीटों पर लड़ी थी। जिसमें उपेंद्र कुशवाहा, सुभासपा, सजद-डी और जनवादी पार्टी का खाता तक नहीं खुला था। ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं। वहीं बसपा एक सीट जीतने में सफल रही है।
हालांकि बाद में ओवैसी की पार्टी के 4 विधायक आरजेडी में चले गए थे। वहीं बसपा के एकमात्र विधायक जमा खान जदयू में शामिल हो गए थे। आज की तारीख में ओवैसी की पार्टी के इकलौते विधायक अख्तरूल ईमान हैं, जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वैसे ओवैसी ने महागठबंधन में शामिल होने की हर संभव कोशिश की। पहले अख्तरूल ईमान ने इंडिया अलांयस के दलों से बातचीत की। महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा। राजद सुप्रीमो लालू यादव को चिट्ठी भी लिखी। लेकिन भाव नहीं मिलने के बाद तीसरा मोर्चा बनाने की बात कही।
हालांकि आरजेडी की तरफ से ये जरूर कहा गया कि अगर ओवैसी महागठबंधन की मदद करना चाहते हैं, और बिहार में दोबारा एनडीए को सत्ता पर बैठने से रोकना चाहते हैं, तो चुनाव न लड़ें। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि कभी-कभी चुनाव न लड़कर भी मदद की जा सकती है। ओवैसी की पार्टी का जनाधार हैदराबाद में है। ऐसे में अगर वो बिहार में चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो भी ये महागठबंधन को मदद होगी।
वहीं तीसरे मोर्चा बनाने की कवायद में जुटी ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने हाल ही में नई पार्टी बनाने वाले इंडियन इंकलाब पार्टी के अध्यक्ष आईपी गुप्ता से मुलाकात की थी। जो एक घंटे से ज्यादा चली थी। जिसके बाद से चर्चा थी, कि छोटे दलों को साथ लाने की कवायद ओवैसी की पार्टी ने तेज कर दी है। लेकिन मायावती ने साफ कर दिया है, कि वो बिहार में अकेले लड़ेंगी। और किसी से कोई गठबंधन नहीं करेंगी।




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