many alive pensioners are in death list in bihar not getting pension बिहार में हजारों जिंदा पेंशनधारी डेथ लिस्ट में, पेंशन के लिए अब भटक रहे, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार में हजारों जिंदा पेंशनधारी डेथ लिस्ट में, पेंशन के लिए अब भटक रहे

कुढ़नी के केरमा डीह निवासी शंकर साह चार साल से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे थे। चार माह पहले इन्हें मृत बताकर पेंशन बंद कर दी गई। उसके बाद वे खुद को जिंदा साबित करने को भटक रहे हैं। मुखिया, सरपंच व बीडीओ के सामने सदेह पेश होकर थक गए हैं।

Thu, 12 Feb 2026 07:44 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, कुंदन कुमार, मुजफ्फरपुर
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बिहार में हजारों जिंदा पेंशनधारी डेथ लिस्ट में, पेंशन के लिए अब भटक रहे

बिहार में बड़ी संख्या में पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण अधर में अटक गया है। जीवन प्रमाणीकरण नहीं होने से हजारों पेंशनधारियों को मृत की सूची में डालकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। ऐसे में ये पेंशनधारी खुद को जीवित साबित करने की जंग लड़ रहे हैं। इनमें वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं। सामाजिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा जारी समीक्षा रिपोर्ट जारी चौंकाने वाली है।

निदेशालय की सचिव वंदना प्रेयसी ने समीक्षा में बताया है कि सूबे में 1.24 करोड़ पेंशनधारी हैं। इनमें से 82.61 लाख का जीवन प्रमाणीकरण हो पाया है। फैसिलिटेशन सेंटर पर नि:शुल्क जीवन प्रमाणीकरण करने के आदेश के बावजूद 41.65 लाख पेंशनधारियों को जीवन प्रमाणीकरण नहीं हो पाया है। सचिव ने सभी डीएम को कहा है कि वे रुचि लेकर जीवन प्रमाणीकरण का कार्य संपन्न कराएं, ताकि जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिल पाये।

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कहां कितने पेंशनधारी

सचिव की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर में जीवन प्रमाणीकरण न होने वाले पेंशनधारियों की संख्या 1.97 लाख है। वहीं, गोपालगंज में 1.32 लाख, सीवान में 1.59 लाख, किशनगंज में 75021, पूर्णिया में 1.41 लाख, नवादा में 1.11 लाख, शेखपुरा में 30734, कटिहार में 1.32 लाख, अररिया में 1.33 लाख पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा पटना में 2.22 लाख, गया में 1.77 लाख, पूर्वी चंपारण में 2.6 लाख, दरभंगा में 1.67 लाख, पश्चिम चंपारण में 1.57 लाख, मधेपुरा में 82 हजार, बेगूसराय में 1.05 लाख हैं।

सारण में 1.59 लाख, औरंगाबाद में 1.01 लाख, खगड़िया में 62 हजार, जमुई में 67428, शिवहर में 27314, सीतामढ़ी में 1.21 लाख, भागलपुर में 1.06 लाख, समस्तीपुर में 1.57 लाख, सहरसा में 76194, वैशाली में 1.33 लाख, मधुबनी में 1.85 लाख, बांका में 75238, बक्सर में 60766, नालंदा में 1.25 लाख, सुपौल में 77 हजार, कैमूर में 55806, रोहतास में एक लाख, भोजपुर में 82139, जहानाबाद में 36277 व अरवल में 21762 पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण अधर में लटका हुआ है।

जिंदा साबित करने के लिए भटक रहे

कुढ़नी के केरमा डीह निवासी शंकर साह चार साल से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे थे। चार माह पहले इन्हें मृत बताकर पेंशन बंद कर दी गई। उसके बाद वे खुद को जिंदा साबित करने को भटक रहे हैं। मुखिया, सरपंच व बीडीओ के सामने सदेह पेश होकर थक गए, तब जिला कल्याण कार्यालय पहुंचे। वहां कहा कि कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर से सारे दस्तावेज के साथ आवेदन कीजिए। दो बार आवेदन किया, फिर भी मृतकों की सूची से नाम नहीं हट सका है।

दरियापुर कफेन गांव के सत्यनारायण राय की कहानी भी यही है। दो साल से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा था। बीते सितंबर में पेंशन नहीं आई तो अंचल कार्यालय पता करने गए। वहां बताया गया कि उनका नाम मृतकों की सूची में है, इसलिए पेंशन बंद हो गई है। सितंबर से आज तक ये खुद को जिंदा साबित करने के लिए भटक रहे हैं। सत्यनारायण ने रुंधे गले से बताया, पेंशन ही सहारा है। मृत बताकर पेंशन ही बंद कर दी। अब कहां जाएं?

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