कितना पैसा लिए हो शराब वालों से, वही पैसा बहा रहे हो; प्रशांत किशोर से पूछने लगे जेडीयू के मनीष वर्मा
जन सुराज पार्टी की सरकार बनने पर फौरन शराबबंदी को बंद करने का खुला ऐलान कर चुके प्रशांत किशोर पर जेडीयू महासचिव मनीष वर्मा ने बड़ा हमला किया है। उन्होंने पूछा है कि शराब वालों से कितना पैसा लिया गया है और क्या उसी पैसे से प्रचार चल रहा है।

जन सुराज पार्टी की सरकार बनने पर बिहार से शराबबंदी फौरन हटाने का खुला ऐलान कर चुके प्रशांत किशोर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद करीबी और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा ने बड़ा हमला बोल दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए मनीष वर्मा ने प्रशांत किशोर से सीधा सवाल पूछा है कि उन्होंने शराब वालों से कितना पैसा लिया है और क्या वह उसी पैसे को जन सुराज पार्टी के प्रचार में बहा रहे हैं।
मधुबनी जिले के लौकहा विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कार्यकर्ता सम्मेलन में जेडीयू नेता मनीष वर्मा ने कहा- “पहचानिए इस दगाबाज को, जो गांधी जी का नाम लेकर। गांधी जी ने कहा था कि अगर मुझे एक घंटे के लिए भी तानाशाह बना दिया जाए भारत का, तो सबसे पहला काम करूंगा कि यहां पर शराबबंदी लागू कर दूंगा और जितनी भी शराब की दुकानें हैं, बिना मुआवजे के बंद करा दूंगा। ये गांधी जी ने कहा था। बयान चेक कर लीजिए। और ये व्यक्ति कहता है, मैं आता हूं, मैं आऊंगा तो एक घंटे में शराब की नदी खोल दूंगा।”
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मनीष वर्मा ने इसके बाद गियर बदल दिया और प्रशांत किशोर पर आरोपों की बरसात कर दी। उन्होंने कहा- “क्या बात है जी। क्यों इतनी हड़बड़ी है। कितना पैसा लिए हो शराब ठेका वालों से। क्या उसी से अपना कैंपेन चला रहे हो। यही शराब का पैसा यहां बहा रहे हो। क्या बात है। यही चाहते हो। जितने भी बच्चे हैं, पति हैं, पिता हैं, सब शराब के नशे में डूब जाएं। बिहार को बर्बाद कर देना चाहते हो।”
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बता दें कि 2016 में जब सीएम नीतीश कुमार महागठबंधन की सरकार चला रहे थे, तब उन्होंने कानून बनाकर राज्य में शराब की बिक्री और उपभोग दोनों पर रोक लगा दी थी। बिहार में इस कानून के तहत लाखों लोग गिरफ्तार हुए हैं और इसकी वजह से अदालतों पर मुकदमों के बोझ को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक टिप्पणी कर चुका है। जनता पार्टी की सरकार के दौरान 1977 में भी बिहार में एक बार शराबबंदी लागू हुई थी, लेकिन नेता, अफसर, पुलिस और शराब माफिया ने उसे अवैध कमाई का धंधा बना लिया जिससे शराबबंदी नाकाम हो गई था। प्रशांत किशोर कहते रहे हैं कि महात्मा गांधी ने कभी शराबबंदी की बात नहीं कही बल्कि यह कहा था कि शराब बुरी चीज है और लोग इसे नहीं पिएं, इसके लिए उन्हें जागरूक करना चाहिए।




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