लालू यादव ने ठुकराया शिवचंद्र राम का इस्तीफा, MLC नहीं बनाने पर खूब रोए थे RJD के दलित नेता
आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने शिवचंद्र राम का इस्तीफा ठुकरा दिया है। एमएलसी नहीं बनाए जाने से नाराज पूर्व मंत्री शिवचंद्र ने आरजेडी से इस्तीफा दे दिया था। एक दिन पहले वह मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोए भी थे।

बिहार विधान परिषद चुनाव में एमएलसी कैंडिडेट नहीं बनाने पर रोने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दलित नेता शिवचंद्र राम का इस्तीफा पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने ठुकरा दिया है। एक दिन पहले मीडिया के सामने उन्होंने इस्तीफे का ऐलान किया था और फूट-फूटकर रोए थे। पार्टी ने सुनील सिंह को एमएलसी कैंडिडेट बनाया है। अब आरजेडी की ओर से कहा गया है कि शिवचंद्र का इस्तीफा लालू ने नामंजूर कर दिया है, वे पहले की तरह पार्टी के पद पर बने रहेंगे।
आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने मंगलवार को यह जानकारी की। उन्होंने कहा कि शिवचंद्र राम ने सोमवार को कुछ प्रतिक्रिया दी और उसके बाद पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दिया था। फिर रात में आरजेडी के मुख्य सचेतक सर्वजीत पासवान और अन्य नेता उनके पास गए। उन्होंने शिवचंद्र से विस्तार से चर्चा की और उन्हें मनाया।
आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने शिवचंद्र राम का इस्तीफा सिरे से खारिज कर दिया है। वह बिहार के मंत्री रह चुके हैं और आरजेडी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। शक्ति सिंह ने कहा कि शिवचंद्र राम सामाजिक न्याय के एक मजबूत एवं पुराने सिपाही हैं। सामाजिक न्याय के मूल्यों में उनकी अटूट आस्था है और वे पूर्व की भांति मजबूती के साथ पार्टी में अपने दायित्व निभाते रहेंगे।
MLC नहीं बनाए जाने से नाराज हुए शिवचंद्र राम
बिहार विधान परिषद चुनाव में आरजेडी द्वारा एमएलसी कैंडिडेट नहीं बनाए जाने से शिवचंद्र सोमवार को नाराज हो गए थे और इस्तीफा दे दिया था। पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के मुंहबोले मामा सुनील कुमार सिंह को एमएलसी कैंडिडेट बनाया। उनकी जीत तय है। एमएलसी नहीं बनाए जाने से नाराज शिवचंद्र राम सोमवार को मीडिया से बातचीत में फूट-फूटकर रोए थे। उन्होंने कहा कि वह आरजेडी के वफादार सिपाही के रूप में काम करते आए हैं, लेकिन उनके साथ इंसाफ नहीं किया गया।
शिवचंद्र राम आरजेडी के पुराने दलित चेहरा हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार में मंत्री भी रहे थे। आरजेडी ने उन्हें दो बार लोकसभा का चुनाव लड़ाया लेकिन वे हार गए। 2019 में पशुपति पारस ने उन्हें हाजीपुर से हराया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी सीट पर चिराग पासवान से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2020 में वैशाली जिले की पातेपुर सीट से वह आरजेडी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़े थे, लेकिन हार मिली थी। इससे पहले वह दो बार महुआ और एक बार राजापाकर सीट से विधायक रहे।




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