kushwaha community can not fight election on the name of dangi said patna high court दांगी के नाम पर कुशवाहा जाति के लोग चुनाव नहीं लड़ सकते, पटना हाईकोर्ट का फैसला, Bihar Hindi News - Hindustan
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दांगी के नाम पर कुशवाहा जाति के लोग चुनाव नहीं लड़ सकते, पटना हाईकोर्ट का फैसला

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड के बगही बघमहारपुर पंचायत के मुखिया मनोज प्रसाद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। आवेदक वर्ष 2021 में उक्त पंचायत से मुखिया निर्वाचित हुए थे।

Thu, 23 April 2026 06:04 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, विधि संवाददाता, पटना
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दांगी के नाम पर कुशवाहा जाति के लोग चुनाव नहीं लड़ सकते, पटना हाईकोर्ट का फैसला

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि दांगी और कुशवाहा दो अलग-अलग जातियां हैं। कुशवाहा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में आता है, जबकि दांगी अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) में शामिल है। कोर्ट ने कहा कि ईबीसी के लिए आरक्षित सीट पर ओबीसी समुदाय से संबंधित व्यक्ति मुखिया पद का चुनाव नहीं लड़ सकता। अदालत ने आवेदक के दावे को निराधार बताते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड के बगही बघमहारपुर पंचायत के मुखिया मनोज प्रसाद की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। आवेदक वर्ष 2021 में उक्त पंचायत से मुखिया निर्वाचित हुए थे। उसी पंचायत के संतोष कुमार ने उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर जाली जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव जीत हासिल की गई है। उन्होंने निर्वाचन को निरस्त करने की गुहार राज्य निर्वाचन आयोग से लगाई।

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उनका कहना था कि आवेदक दांगी जाति के बजाय कोइरी (कुशवाहा) जाति से आते हैं। शिकायत के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग ने तीन सदस्यीय समिति से जांच कराई। समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि आवेदक कुशवाहा जाति से आते हैं। अदालत ने आवेदक की अर्जी को खारिज कर दी।

बी फार्मा वालों को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से झटका

इधर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बी. फार्मा धारकों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले जनवरी माह में अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि फार्मासिस्ट के पद पर केवल डी. फार्मा योग्यताधारी अभ्यर्थी ही बहाल हो सकते हैं। अदालत ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार के नियमों को वैध माना था।

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गौरतलब है कि फार्मासिस्ट की बहाली के लिए बनाई गई नियमावली को बी. फार्मा, एम. फार्मा और डी. फार्मा डिग्रीधारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि फार्मासिस्ट पद के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी. फार्मा) ही मान्य योग्यता है।

इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के निर्णय को सही माना और डी. फार्मा अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति के योग्य ठहराया। इसके बाद बी. फार्मा और एम. फार्मा धारकों ने पुनर्विचार याचिका दायर कर बहाली में शामिल करने की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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