जंग की तपिश- रसोई से बाथरूम तक महंगाई की मार
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कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि कटिहार में अब महंगाई का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल या इलेक्ट्रॉनिक्स तक सीमित नहीं रहा। घर-घर रोज इस्तेमाल होने वाले साबुन, डिटरजेंट, रिफाइन और सरसों तेल जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। व्यापारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे माल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के कारण घरेलू उपभोक्ता वस्तुएं लगातार महंगी हो रही हैं। इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है। किराना कारोबारियों के अनुसार अप्रैल से अब तक कपड़ा धोने वाले डिटरजेंट पाउडर की कीमतों में 6 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं घर साफ करने वाले केमिकल उत्पाद भी 4 से 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। एक किलो डिटरजेंट पाउडर, जो पहले 70 रुपये में मिलता था, अब 80 रुपये तक बिक रहा है। इसी तरह एक्सेल जैसे उत्पादों की कीमत 74 रुपये से बढ़कर करीब 80 रुपये तक पहुंच गई है。
व्यापारियों का कहना है
व्यापारियों का कहना है कि पॉम ऑयल, ग्लिसरीन और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की कीमतों में तेजी इसका बड़ा कारण है। ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता के चलते समुद्री परिवहन महंगा हुआ है, जिससे आयातित कच्चे माल की लागत बढ़ गई है। इसका असर सीधे एफएमसीजी उत्पादों पर दिख रहा है।
किराना दुकानदारोंने बतायी अपनी पीड़ा
स्थानीय किराना व्यवसायी सोनू चौधरी, राजन जायसवाल, पुलकित साह और अशोक मंडल बताते हैं कि साबुन और डिटरजेंट के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले तेल और केमिकल लगातार महंगे हो रहे हैं। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री की लागत भी तेजी से बढ़ी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स से जुड़े दीपक चौधरी ने बताया कि पॉलिमर, पॉलिथीन और पॉलीप्रॉपलीन जैसे पैकिंग मैटेरियल की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत तक उछाल आया है। इनका उपयोग साबुन, डिटरजेंट और बिस्किट जैसे उत्पादों की पैकेजिंग में होता है। कंपनियां कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन लागत बढ़ने का असर बाजार में दिखने लगा है। वहीं बड़ा बाजार मंडी के दुकानदार रमेश कुमार के अनुसार रिफाइन और सरसों तेल की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दो माह पहले जो रिफाइन तेल करीब 130 रुपये लीटर था, वह अब 140 रुपये तक पहुंच गया है। सरसों तेल भी 140-150 रुपये से बढ़कर 165 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों की चिंता यह है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं।
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