वोटर लिस्ट रिवीजन पर सीमा लांघ गए सांसद गिरिधारी यादव? जेडीयू ने नोटिस देकर जवाब मांगा
वोटर लिस्ट रिवीजन पर सवाल उठाने वाले जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस भेजकर 15 दिन में जवाब मांगा है। सांसद गिरिधारी ने चुनाव आयोग के मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण को तुगलकी फरमान बताया था।

बिहार में चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन पर सवाल वाले जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव को पार्टी ने कारण नोटिस भेज दिया है। सांसद ने इसे चुनाव आयोग का तुगलकी फरमान बताया था। हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने अपने सांसद के इस बयान से किनारा किया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आफाक अहमद खान ने नोटिस भेजकर यादव से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
गिरिधारी यादव को पार्टी की ओर से मिले नोटिस में कहा गया है कि मतदाता गहन पुनरीक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर खासकर चुनावी साल में सांसद ने जो बयान दिया है, वह सिर्फ जेडीयू के लिए शर्मनाक नहीं है बल्कि विपक्ष के 'आधारहीन' आरोपों को भी बढ़ावा देता है।
जेडीयू सांसद ने क्या कहा था?
बांका से सांसद गिरिधारी यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि चुनाव आयोग ने जबरन वोटर लिस्ट रिवीजन हम पर थोप दिया। आयोग को बिहार के भूगोल और इतिहास का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। मतदाताओं को फॉर्म और दस्तावेज जमा करने को एक महीने का समय दिया गया, जो अव्यावहारिक है। इसके लिए कम से कम 6 महीने का समय दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा, "मुझे खुद अपने दस्तावेज इकट्ठा करने में 10 दिन लग गए। मेरा बेटा अमेरिका में है। वह एक महीने के अंदर कैसे फॉर्म साइन करके दे सकता है?" हालांकि, गिरिधारी यादव ने इसे अपना निजी बयान बताया और कहा कि पार्टी का इस पर क्या मानना है इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता है।




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