खाना मत खाइए... पीएम मोदी की अपील पर प्रशांत किशोर ने ली चुटकी, CJP को हल्के में ना ले BJP
प्रशांत किशोर ने पीएम नरेंद्र मोदी के पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील पर तंज कसा है। यह भी कहा है कि बीजेपी को कॉक्रोच सत्ता में बैठी जनता पार्टी और अन्य दलों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

Prashant Kishor: पश्चिम एसिया में जारी युद्ध के बीच भारत में पेट्रोल डीजल बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जन सुराज के लीडर प्रशांत किशोर ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कभी यह ना कह दें कि खाना मत खाओ। उन्होंने सम्राट चौधरी के एक मंत्री पर इंधन की बचत का दिखावा करने का आरोप लगाया। कहा कि मंत्री जी ट्रेन से जाते हैं पर उन्हें रिसीव करने के लिए दस गाड़ियों का काफिला पीछे-पीछे जाता है। उन्होंने दावा किया कि कॉक्रोच जनता पार्टी को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) हल्के में नहीं ले। सत्ता में बैठे लोगों के लिए सीजेपी बड़ी चुनौती है क्यों कि काम समय में करोड़ों लोगों ने इस पार्टी को तबज्जो दिया है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि मोदी जी कहते हैं कि सोना मत खरीदो, पेट्रोल मत उपयोग करो, कभी कहेंगे कि खाना मत खाओ। एक तरफ दावा करते हैं कि भारत विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। दूसरी ओर लोगों को मितव्ययी होने का पाठ पढ़ाते हैं। दो महीने के युद्ध में ही पेट्रोल, डीजल, गैस सबकी किल्लत हो गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गाड़ियों की संख्या कम करने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पीके ने कहा कि देश की जनता महंगाई से त्रस्त है, ऐसे में विश्व गुरु,का दावा सिर्फ जुमला बनकर रह गया है। यह पेट्रोल बचाओ है या ‘पेट्रोल खपाओ’, यह तो मोदी जी ही बता सकते हैं। अगर देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, तो फिर आम लोगों को गैस, तेल और जरूरी संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
पीके ने कहा कि बिहार सरकार के एक मंत्री ट्रेन से पटना से गए और उन्हें रिसीव करने के लिए पटना से दस गाड़ियों का काफिला निकला। यह कौन सा पेट्रोल बचाव है। मोदी जी ने पहले भी कहा था कि सभी लोग सफाई करें। लेकिन, उसका क्या हुआ। सभी लोगों ने झाड़ू लेकर फोटो और वीडियो बनाया और फिर भूल गए।
कॉक्रोच जनता पार्टी’ को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि यह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक डिजिटल अभियान है। उन्होंने कहा कि अगर करोड़ों लोग किसी मंच से जुड़ रहे हैं तो यह इस बात का संकेत है कि समाज में भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी को लेकर गहरी नाराजगी है। सत्ता में बैठे दलों को इस पर मनन करना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। इसे हल्के में बिल्कुल मत लें नहीं तो कुछ भी हो सकता है।




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