इजरायल-ईरान युद्ध की बिहारियों पर मार; उड़ानें रद्द होने से 50 यात्री एयरपोर्ट से लौटे
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से कतर-दुबई जाने वाली उड़ानें रद्द हो गईं। 50 से अधिक यात्री फंसे रहे। कई ने कर्ज लेकर वीजा बनवाया था। टिकट रद्द होने से आर्थिक नुकसान और परेशानी बढ़ गई।

पश्चिम एशिया में युद्ध होने के कारण कतर, दमन, दुबई सहित खाड़ी देशों के सभी एयरबेस को बंद होने से इसकी सीधी मार बिहारवासियों पर पड़ी है। खाड़ी देश जाने वाले बिहार के अलग-अलग जिलों के 50 से अधिक यात्रियों को शनिवार को पटना एयरपोर्ट पर भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। दरभंगा, सीवान, जहानाबाद, सारण, किशनगंज आदि जिलों से आए यात्री दोपहर में बोर्डिंग पास बनवा कर एयरपोर्ट के अंदर प्रवेश कर गए थे। इसी बीच शाम 4 बजे के लगभग यात्रियों को जानकारी मिली कि युद्ध के कारण खाड़ी देश जाने वाले सभी विमानों को रद्द कर दिया गया है।
इसके बाद एयरपोर्ट के प्रथम तल पर स्थित टिकट काउंटर पर टिकट रद्द कराने वाले यात्रियों की भीड़ लग गई। सबसे अधिक भीड़ इंडिगो के टिकट काउंटर पर थी। यात्रियों ने कहा कि हजारों रुपये खर्च कर पटना एयरपोर्ट पहुंचे। बोर्डिंग पास लेने के बाद विमान रद्द होने की जानकारी मिली। हमारे पैसे बर्बाद हो गए, परेशानी हुई वह अलग।
10% पर कर्ज लेकर कतर जाने का लिया था वीजा
एयरपोर्ट पर गोपालगंज निवासी इमाम अली ने बताया कि रोजगार के लिए पहली बार कतर जा रहे थे। पटना से दिल्ली और दिल्ली से कतर जाना था। इसके लिए मुंबई के एक एजेंट से वीजा लिया था। इसके लिए 70 हजार रुपये दिए थे। पैसे नहीं थे तो गांव के महाजन से 10 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज लेकर एजेंट को वीजा के लिए दिया था। 60 दिनों का वीजा लगा था। पता नहीं वीजा की अवधि बढ़ेगी या नहीं। अगर नहीं बढ़ी तो पैसा डूब जाएगा। अगर दोबारा वीजा नहीं मिला, तो बर्बाद हो जाएंगे।
छुट्टी पूरी होने के बाद वापस जा रहे थे
सीवान निवासी उपेंद्र कुमार गिरि ने बताया कि 50 दिनों की छुट्टी लेकर गांव आए थे। वहां वॉटर एंड पावर सेक्टर में काम करते हैं। बोर्डिंग करने के बाद विमान रद्द होने की जानकारी मिली। इसके साथ ही शहजादा खान, मो. कमरुद्दीन, शिवकुमार सहित एक दर्जन से अधिक यात्रियों ने बताया कि हम लोग पिछले कई वर्षों से कतर, दमन आदि जगहों पर नौकरी कर रहे हैं। छुट्टी समाप्त होने के बाद वापस जा रहे थे। लेकिन, विमान रद्द होने के कारण घर लौटना पड़ रहा है। इस दौरान वाहन में हजारों रुपये बर्बाद हुए। साथ ही हजारों रुपये के सामान भी वहां ले जाने के लिए लिये थे, वह भी बर्बाद हो गया।
खाड़ी देशों में 10 हजार से ज्यादा लोग करते हैं नौकरी
एयरपोर्ट पर यात्रियों ने बताया कि सीवान, दरभंगा, जहानाबाद, गोपालगंज आदि जिले के 10 हजार से अधिक लोग खाड़ी देशों में नौकरी करते हैं। इनमें से कई लोग अपने परिवार के साथ भी वहां रहते हैं। यहां के लोग खाना बनाने से लेकर मजदूरी तक करते हैं। लगभग आधे लोग परिवार को भी साथ रखते हैं। कंपनी की ओर से लोगों को बारी-बारी से साल में अधिकतम 45 से 50 दिनों की छुट्टी मिलती है। युद्ध के कारण काफी चिंतित हैं। रोजगार से भी वंचित होना पड़ सकता है। पता नहीं, वहां हमारे आस-पड़ोस के लोगों की स्थिति आने वाले समय में क्या होगी?




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