ईरान-इजरायल युद्ध से बिहार का बाजार गर्म; इलाज महंगा हुआ, पैकेजिंग इंडस्ट्री का बुरा हाल
तीन एमएल वाले सिरिंज का थोक रेट 130 से 142 रुपये प्रति बॉक्स हो गया है। पहले यह 108 रुपये था। इसके अलावा कैथेडर, कमर के बांधने वाला बेल्ट भी महंगा हो गया है।
Iran Israel War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर पेट्रोलियम उत्पादों के साथ प्लास्टिक उत्पादों पर भी पड़ने लगा है। कच्चे माल के दाम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे प्लास्टिक से बनने वाले रबर और दूसरे सर्जिकल सामान महंगे होने लगे हैं। शहर के जूरन छपरा स्थित सर्जिकल आइटम के थोक विक्रेताओं का कहना है कि सिरिंज, ग्लब्स, कैथेडर, जल निकासी प्रणाली, ट्रोकार और कैनुला आदि बनाने वाली कंपनियों ने दाम बढ़ा दिया है। इस कारण सर्जिकल आइटम के थोक भाव में 2 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। खुदरा कीमत 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है।
विक्रेताओं ने बताया कि तीन एमएल वाले सिरिंज का थोक रेट 130 से 142 रुपये प्रति बॉक्स हो गया है। पहले यह 108 रुपये था। इसके अलावा कैथेडर, कमर के बांधने वाला बेल्ट भी महंगा हो गया है। मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में मेडिकल उत्पाद बनाने वाली तीन यूनिटों पर प्लास्टिक दाने की कीमत में बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ा है। प्लास्टिक दाना आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने कोटा में 60 फीसदी तक की कटौती कर दी है। इससे 110 रुपये बिकने वाला प्लास्टिक दाना 265 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है।
फ्लैक्स और होर्डिंग बनवाना हुआ महंगा
प्लास्टिक के कच्चा माल की कीमत में बढ़ोतरी से फ्लैक्स और होर्डिंग बनवाना महंगा हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि महंगाई के चलते 6 रुपये प्रति वर्ग फीट की जगह 9 रुपये प्रिंटिंग की जा रही है। नया ऑर्डर कम हो गया है। पुराना ऑर्डर पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है। इससे पांच दर्जन से अधिक फ्लैक्स वाले प्रभावित हैं। बताया कि पॉलीथिन पर भी महंगाई का असर दिख रहा है।
प्लास्टिक से बनने वाले उत्पाद
● सिरिंज व सुई
● फीडिंग ट्यूब
● कैथेडर
● स्केलपेल के हैंडल व ब्लेड
● रिट्रैक्टर
● ट्रोकार और कैनुला
● जल निकासी प्रणाली
● सर्जिकल टांके व स्टेपलर
होम डिलीवरी में कमी आने से उठाना पड़ रहा नुकसान
बेला और मोतीपुर औद्योगिक क्षेत्र में पैकेजिंग इंडस्ट्री का भी बुरा हाल है। एक फैक्ट्री के एमडी ने बताया कि पैकेजिंग इंडस्ट्री दोहरी मार झेल रहा है। प्लास्टिक दाने की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। ऑनलाइन फूड, ग्रोसरी, टॉय, कॉस्मेटिक आदि की होम डिलीवरी में गिरावट आई है। ऐसे में पैकेजिंग उत्पादों की मांग घटी है। कहा कि उत्पादन लागत 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गया है। इसके बावजूद जिनका पहले का ऑर्डर है, उनको पुरानी दर पर सामान उपलब्ध कराना है




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