लू के दिन बढ़ेंगे, बारिश कम होगी, नदी-तालाब सूखेंगे; सुपर अलनीनो से कितना बदलेगा बिहार का मौसम?
मौसम और जलवायु विषयों के जानकार बताते हैं कि अलनीनो से बिहार पूरी तरह अछूता नहीं रहेगा, लेकिन सूबे का मौसम चक्र देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा कम प्रभावित होगा।

Super El Nino: सुपर अलनीनो को लेकर देशभर में चल रही व्यापक चर्चाओं के बीच बिहार के मौसम चक्र, विशेषकर मानसून पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। यह जुलाई से शुरू होकर अगले साल फरवरी तक वैश्विक स्तर पर असर दिखाएगा। बिहार में बारिश पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सबसे नजदीक मानसून का मौसम है। पिछले दस वर्षों में सात बार मानसून की मार झेल चुके बिहार के लिए क्या यह खतरे का संकेत है, इसे लेकर मौसमविदों और जलवायुविदों की अलग-अलग राय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार पर इसका असर देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कम होगा। मौसम और जलवायु विषयों के जानकार बताते हैं कि इस वैश्विक घटना से बिहार पूरी तरह अछूता नहीं रहेगा, लेकिन सूबे का मौसम चक्र देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा कम प्रभावित होगा। एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक मई और जुलाई 2026 के बीच अलनीनो बनने की 82 प्रतिशत संभावना है, जबकि दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की 96% संभावना जताई गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव कमोबेश अक्टूबर 2027 तक बना रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सुपर अल-नीनो के कारण बिहार में कम बारिश और भीषण गर्मी पड़ने की आशंका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के जुलाई से कमजोर पड़ने की संभावना है, जिससे अगस्त और सितंबर में सामान्य से काफी कम वर्षा हो सकती है। सीधा असर खरीफ फसलों, विशेषकर धान, मक्का की बुवाई तथा उत्पादन पर पड़ सकता है।
क्या है सुपर अलनीनो
अलनीनो एक मौसम संबंधी प्राकृतिक जलवायु घटना है, यह घटना पूर्वी प्रशांत सागर में समुद्र का तापमान सामान्य से काफी अधिक होने पर बनती है। सुपर अलनीनो इसी का थोड़ा बड़ा स्वरूप है। इसके असर से पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। गर्मी से वैश्विक पवन पैटर्न कमजोर या परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे एकशृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है, जो विश्व की मौसम प्रणालियों को बाधित करती है। पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म होने के साथ पूर्व की ओर बढ़ने लगता है, जिससे भारत के मौसम पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ता है।
सुपर अलनीनो का साइड इफेक्ट
● सुपर अलनीनो के प्रभाव से बिहार के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने और लू के दिन बढ़ेंगे।
● प्रशांत महासागर में बन रही इस स्थिति के कारण बिहार में इस साल सामान्य से दस प्रतिशत कम बारिश का अनुमान।
● कम बारिश के चलते धान, मक्का और दलहन जैसी मुख्य फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका।
● बारिश न होने से नदियां-तालाब सूखेंगे और भूजल स्तर गिरेगा।
बिहार में नहीं बनेंगे सूखे के हालात: प्रो. प्रधान
जलवायुविद् और सीयूएसबी के प्रो.डॉ. प्रधान पार्थ सारथी का कहना है कि बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बिहार के मौसमी पैटर्न को प्रभावित करता है। यह स्पष्ट है कि देश के अन्य हिस्सों से बिहार पर सुपर अलनीनो का प्रतिकूल असर कम पड़ेगा। उन्होंने साल 2002 के मानसून की बारिश का हवाला देते हुए कहा कि जब अलनीनो व्यापक रूप से देशभर को प्रभावित कर रहा था, तब बिहार में बारिश की बहार थी। ऐसे में दोनों तरह की परिस्थितियां बन सकती हैं।




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