गिरफ्तारी दो, बेल नहीं लो, माहौल बदल जाएगा; राहुल, तेजस्वी को आज जेल जाने की सलाह मिली थी
वोटर लिस्ट रिवीजन के विरोध में बिहार बंद के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी लीडर तेजस्वी यादव को बुधवार को जेल जाने की सलाह मिली थी। आरजेडी के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने दोनों नेताओं को गिरफ्तारी देकर जमानत नहीं लेने का सुझाव दिया था।

चुनाव आयोग के मतदाता गहन पुनरीक्षण के विरोध में महागठबंधन ने बुधवार को बिहार बंद बुलाया। पटना में बंद के दौरान आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी सड़क पर उतरे। राहुल और तेजस्वी को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने जेल जाने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इससे देश का माहौल बदल जाएगा। हालांकि, मार्च और भाषण के बाद महागठबंधन का पटना में प्रदर्शन खत्म हो गया। फिर राहुल गांधी सीधे दिल्ली लौट गए। तेजस्वी और अन्य नेता भी अपने-अपने घर चले गए।
आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के करीबी माने जाने वाले शिवानंद तिवारी ने बुधवार सुबह महागठबंधन का मार्च शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, “राहुल और तेजस्वी दोनों आज विरोध प्रदर्शन में साथ रहेंगे। वे चुनाव आयोग के कार्यालय तक जाएंगे। उन दोनों से मेरा एक नम्र सुझाव है। अगर आप दोनों चुनाव आयोग के गेट तक पहुंच गए तो वहां धरना दे दीजिए। संभव है पुलिस वहां आपको पहुंचने नहीं दे। वैसी हालत में जहां पुलिस रोकती है, वहीं धरना पर बैठ जाइए। पुलिस आप लोगों को हिरासत में लेती है तो जमानत मत लीजिए। अगर ऐसा हो जाता है तो देश का माहौल बदल जाएगा।”
हालांकि, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के अन्य नेताओं ने शिवानंद तिवारी की इस सलाह पर गौर नहीं किया। पटना पहुंचने के बाद राहुल आयकर गोलंबर से एक ओपन ट्रक में चढ़ गए। उनके साथ तेजस्वी के अलावा वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम समेत अन्य नेता भी मौजूद रहे। मार्च आगे बढ़ा लेकिन शहीद स्मारक के पास पुलिस ने इसे रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश भी की लेकिन वे नाकाम रहे। इसके बाद राहुल और तेजस्वी ने शहीद स्मारक के पास ही ओपन ट्रक से संबोधन दिया। फिर मार्च को वहीं खत्म कर सभी नेता वहां से निकल गए। दूसरी ओर, बिहार राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय के गेट पर अधिकारी उनका इंतजार करते रह गए।




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