नीतीश की जेडीयू में बदला ध्रुवीय समीकरण! अशोक चौधरी ने ललन सिंह के पैर छुए
बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के दो बड़े नेता ललन सिंह और अशोक चौधरी के बीच एक समय विवाद रहा था। बुधवार को सूर्यगढ़ा में जनसभा के दौरान अशोक चौधरी ने ललन सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड में ध्रुवीय समीकरण बदल रहा है। नीतीश के दो करीबी नेता ललन सिंह और अशोक चौधरी के बीच संबंध बेहतर होते नजर आ रहे हैं। दोनों नेताओं ने बुधवार को लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा में एक साथ जनसभा की। इस दौरान मंच पर अशोक चौधरी ने ललन सिंह के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसकी सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। बता दें कि एक समय जदयू के दोनों प्रमुख नेताओं के बीच तीखा मनमुटाव था।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और नीतीश सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री ललन सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह ने बुधवार को सूर्यगढ़ा में एक जनसभा को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में लखीसराय जिले की 200 करोड़ से अधिक लागत वालीं 135 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। सूर्यगढ़ा में हुई इस रैली में ललन सिंह बतौर क्षेत्रीय सांसद शामिल हुए। मंच पर पहुंचते ही अशोक चौधरी ने ललन सिंह के पैर छुए। फिर केंद्रीय मंत्री ने भी उनके कंधे पर हाथ रखकर स्नेह जताया।
जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार के लिए यह तस्वीर सुखद एहसास वाली हो सकती है। ललन सिंह भूमिहार जाति से आते हैं और वे करीब ढाई साल तक जदयू के अध्यक्ष भी रहे। दूसरी ओर, अशोक चौधरी महादलित समाज से आते हैं। वे कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे महावीर चौधरी के बेटे हैं। ललन सिंह के जदयू अध्यक्ष रहते हुए अशोक चौधरी से उनका विवाद हो गया था, जो राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा में रहा था।
यह वाकया सितंबर 2023 का है, जब पटना में जदयू की बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई थी। ललन सिंह ने अशोक चौधरी के जमुई और शेखपुरा के बरबीघा की राजनीति में सक्रियता दिखाने पर आपत्ति जताई थी। इस पर चौधरी भड़क गए और उन्होंने ललन सिंह को बहुत तल्ख लहजे में जवाब दिया था कि वह उन्हें रोकने वाले कौन होते हैं। अशोक चौधरी ने बरबीघा को अपना घर बताया और कहा था कि वह नीतीश को कहकर वहां जाते हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बहसबाजी से वहां मौजूद पार्टी के अन्य लीडर भी हैरान रह गए थे। इसके बाद कुछ सीनियर नेताओं ने दोनों को अलग किया था।




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