Election Commission holds back final numbers of Bihar SIR draft voter list claims objections data for two days दो दिन से मौन क्यों है चुनाव आयोग? बिहार में मतदाता सूची पर आपत्ति या दावा के फाइनल नंबर का इंतजार, Bihar Hindi News - Hindustan
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दो दिन से मौन क्यों है चुनाव आयोग? बिहार में मतदाता सूची पर आपत्ति या दावा के फाइनल नंबर का इंतजार

बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावा और आपत्ति का हर दिन नंबर बताने वाला चुनाव आयोग दो दिन से फाइनल डेटा पर मौन है। 1 सितंबर को ही डेडलाइन था। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया है कि नामांकन की आखिरी तारीख तक दावा-आपत्ति लेंगे।

Wed, 3 Sep 2025 12:29 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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दो दिन से मौन क्यों है चुनाव आयोग? बिहार में मतदाता सूची पर आपत्ति या दावा के फाइनल नंबर का इंतजार

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) के बाद 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर तब से 1 सितंबर तक दाखिल दावा और आपत्ति के फाइनल नंबर पर चुनाव आयोग दो दिन से मौन है। आयोग 1 अगस्त के बाद से ही प्रतिदिन दोपहर तक उस दिन सुबह 10 बजे तक निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिले दावा-आपत्ति का नंबर जारी कर देता था। दावा और आपत्ति के लिए पूर्व निर्धारित आखिरी तारीख 1 सितंबर की सुबह 10 बजे तक का डेटा भी आयोग ने जारी कर दिया लेकिन उस दिन सुबह 10 बजे से शाम तक और कितने दावा और आपत्ति दाखिल हुए, इसका हिसाब सामने नहीं आया है।

चुनाव आयोग ने हालांकि सुप्रीम कोर्ट में डेडलाइन बढ़ाने की अपील पर सोमवार को सुनवाई के दौरान भरोसा दिया था कि विधानसभा चुनाव में नामांकन की आखिरी तारीख तक वोटर से दावा और आपत्ति लिए जाएंगे। सही रहने पर मतदान से पहले ऐसे नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। निर्धारित समय-सारणी के मुताबिक 1 सितंबर तक मिले दावा और आपत्ति का 25 सितंबर तक निबटारा करने के बाद 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होना है।

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चुनाव आयोग ने 1 सितंबर की दोपहर 12.51 बजे उस दिन सुबह 10 बजे तक मिले दावा और आपत्ति का जो हिसाब जारी किया था, उसके मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीआई-एमएल) के बूथ लेवल एजेंट (बीएलओ) ने कुल 144 आवेदन किए थे। इसमें 25 नाम जोड़ने के लिए और 119 नाम हटाने के लिए दाखिल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद पार्टियों ने कोई खास सक्रियता नहीं दिखाई। लिस्ट से 65 लाख मतदाताओं के नाम निधन, बाहर बसने या एक से अधिक बूथ पर नाम होने के कारण कटे हैं।

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वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और उनके बीएलए से हजार गुना सक्रियता प्रभावित वोटरों ने दिखाई। राजनेता बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और कोर्ट-कचहरी में ही बिजी रह गए। मतदाताओं ने बड़ी संख्या में खुद ही निर्धारित फॉर्म में दावा, आपत्ति और नाम जोड़ने के आवेदन किए। आयोग से 1 सितंबर को जारी आखिरी नंबर के मुताबिक 36475 नाम जोड़ने और 217049 नाम हटाने के आवेदन मिले। 18 वर्ष की उम्र पार कर चुके 16 लाख 56 हजार से ज्यादा लोगों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का आवेदन किया है। इसमें 45 फॉर्म राजनीतिक दलों के बीएलए ने जमा कराए।

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