Efforts to get SC status for Paan Tanti caste Nitish government filed a review petition in the Supreme Court पान-तांती जाति को एससी का दर्जा दिलाने की कवायद, नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डाली, Bihar Hindi News - Hindustan
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पान-तांती जाति को एससी का दर्जा दिलाने की कवायद, नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डाली

पान-तांती जाति को एससी का दर्जा दिलवाने के लिए नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2024 के फैसले खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। इससे सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के 9 साल पुराने फैसले को निरस्त कर दिया। जिसके बाद पान-तांती जाति को दोबारा अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) में शामिल किया गया था।

Fri, 4 July 2025 02:54 PMsandeep लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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पान-तांती जाति को एससी का दर्जा दिलाने की कवायद, नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डाली

नीतीश सरकार ने पान- तांती जाति को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल किए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2024 में दिए गए फैसले के विरुद्ध रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। शुक्रवार को सामान्य प्रशासन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इसके पहले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा तांती जाति को पिछड़े वर्गों की अनुसूची में क्रमांक 33 पर दोबारा शामिल कर दिया है। आपको बता दें जुलाई 2024 मेंं सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के 9 साल पहले तांती-तंतवा जाति को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने के फैसले को निरस्त कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एससी लिस्ट में किसी जाति का नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार राज्य के पास नहीं है और यह काम सिर्फ संसद कर सकती है। एससी लिस्ट में दूसरी जाति को जोड़ने से अनूसूचित जाति के लोगों की हकमारी होती है। कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान के आर्टिकल 341 के तहत राज्य को अनुसूचित जाति की सूची में छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है।

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कोर्ट के आदेश के बाद तांती-तंतवा जाति को अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) शामिल किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार के 1 जुलाई 2015 के संकल्प को रद्द करते हुए आदेश दिया कि इन नौ सालों में तांती-तंतवा जाति के जिन लोगों को भी एससी कोटे के आरक्षण का लाभ मिला है उन्हें ईबीसी कोटा में समायोजित किया जाए और इससे खाली होने वाली सीटों और पदों को एससी जाति के लोगों से भरा जाए। डॉ भीमराव आंबेडकर विचार मंच और आशीष रजक की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने यह फैसला सुनाया था।

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राज्य सरकार के फैसले के खिलार पहले पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने सरकार के संकल्प में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए 3 अप्रैल 2017 को याचिका खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट गए थे।

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