Congress rebel MLA Manoj Bishwas changing statements RJD candidate AD Singh good on 12 March disliked on 16 March बयान बदल रहे बागी विधायक; 12 मार्च को तेजस्वी के एडी सिंह अच्छे प्रत्याशी थे, 16 मार्च को नापसंद हो गए, Bihar Hindi News - Hindustan
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बयान बदल रहे बागी विधायक; 12 मार्च को तेजस्वी के एडी सिंह अच्छे प्रत्याशी थे, 16 मार्च को नापसंद हो गए

Congress MLA Manoj Bishwas: कांग्रेस के बागी विधायक मनोज विश्वास ने राज्यसभा चुनाव में राजद की हार के बाद अब कह रहे हैं कि एडी सिंह नापसंद थे, इसलिए वोट नहीं दिया। मनोज ने 12 मार्च को एडी सिंह को अच्छा प्रत्याशी माना था।

Wed, 18 March 2026 04:50 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बयान बदल रहे बागी विधायक; 12 मार्च को तेजस्वी के एडी सिंह अच्छे प्रत्याशी थे, 16 मार्च को नापसंद हो गए

Congress MLA Manoj Bishwas: बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों के चुनाव में मात्र एक सीट लड़ रहे विपक्षी महागठबंधन के प्रत्याशी अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह की हार के बाद वोट नहीं देने वाले कांग्रेस के बागी विधायक मनोज बिश्वास खुलकर अपने वोट बहिष्कार का बचाव कर रहे हैं। मनोज बिश्वास का दावा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राम ने कहा था कि विधायक स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं। मनोज विश्वास कह रहे हैं कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कैंडिडेट एडी सिंह पसंद नहीं थे, इसलिए 16 मार्च को वोट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वो पटना में ही थे, लेकिन मोबाइल बंद करके बैठ गए थे, क्योंकि पहले तय कर लिया था कि वो एडी सिंह को वोट नहीं देंगे। लेकिन, चुनाव से चार दिन पहले 12 मार्च को मनोज बिश्वास ने ठीक इसके उलट बातें की थी और कहा था कि एडी सिंह अच्छे प्रत्याशी हैं।

मनोज बिश्वास ने अपने फेसबुक पेज पर 12 मार्च के इंटरव्यू का वीडियो भी शेयर कर रखा है। इस वीडियो में महागठबंधन की बैठक में चार विधायकों के नहीं पहुंचने के सवाल पर कह रहे हैं- “चार नहीं, तीन नहीं थे। कमरूल होदा का मुख्यमंत्री का प्रोग्राम था, इसलिए नहीं आ पाए। अररिया वाले अबिदुर रहमान विदेश गए हुए हैं, वो आज रात में आएंगे। मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह बीमार रहते हैं। सबसे बात हुई है। इंडिया गठबंधन के तमाम सहयोगी दल एक प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं। एडी सिंह व्यवहार कुशल प्रत्याशी हैं। कल उनसे परिचय हुआ। हमको लगा कि हमारे नेता जो चयन किए हैं, अच्छे प्रत्याशी हैं। महागठबंधन एकजुट है। बस मीडिया में चल रहा है कि कांग्रेस यहां जा रहा है। कांग्रेस वहां जा रहा है। छह के छह विधायक इंडिया गठबंधन के साथ हैं।”

12 मार्च के इस इंटरव्यू का आखिरी हिस्सा उनके राजनीतिक खेल का संकेत देता है, जब वो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के सवाल पर कहते हैं- “बिहार में 16 मार्च के बाद बहुत खड़ा खेला होने वाला है। नीतीश बाबू हैं। उनको सब समझ नहीं सकते। ये नीतीश बाबू हैं। कितने को सलटा देते हैं। 16 तारीख के बाद इसको और अच्छे से देखिएगा।” 16 मार्च या उसके बाद नीतीश कोई खेला करते नहीं दिख रहे हैं, लेकिन मनोज बिश्वास समेत 4 विधायकों के गायब होने से राज्यसभा की सारी सीटें एनडीए जीत गया। एडी सिंह की सीट विपक्षी एकजुटता से बच सकती थी, लेकिन नहीं बची।

राज्यसभा चुनाव में 16 मार्च को हुए चुनाव में एडी सिंह की हार के बाद 17 मार्च को मनोज बिश्वास मीडिया के सामने आए तो नई कहानी सुनाने लगे। एक इंटरव्यू में कहा- “कल पटना में ही थे। हम पहले ही तय कर लिए थे कि वोट नहीं गिराना है। पहले कयास लगाया जा रहा था कि हिना शहाब जाएंगी। अब्दुल बारी सिद्दीकी जाएंगे। एससी-एसटी से कोई जाएंगे। ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमारे दल के नेता को सम्मान नहीं दिया गया। हमने नेता को पहले बता दिया था। वो बोले कि आपलोग स्वतंत्र हैं, आप जो निर्णय लीजिएगा, लीजिए। हम लोग का खरीद-फरोख्त नहीं हो सकता है। हम कांग्रेस के मजबूत सिपाही हैं। दल का विरोध तब होता, जब क्रॉस वोटिंग करते। हम दल के साथ खड़े हैं और सम्मान के साथ खड़े हैं। दल जो निर्णय लेगा, उसको स्वीकार कर लेंगे।”

17 मार्च को ही पत्रकारों के दूसरे समूह से मनोज बिश्वास कहते हैं- “हमको प्रत्याशी पसंद नहीं था, इसलिए वोट नहीं किए। हम लोग सामान नहीं हैं कि कोई खरीद लेगा। हम लोग सम्मान के भूखे हैं। हमारे प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव में महत्व नहीं दिया गया। दल के नेता का सम्मान नहीं हुआ। नेता का जो आदेश होगा, वो हम लोग करेंगे। नेता बोला कि आप स्वतंत्र हैं। पहले चर्चा थी कि हिना शहाब को प्रत्याशी बनाया जाएगा। नामांकन से एक दिन पहले प्रत्याशी की घोषणा होती है। प्रत्याशी के विरोध में हम लोग वोट नहीं दिए। क्रॉस वोटिंग करते तो कांग्रेस के साथ गद्दारी होती। हमको प्रत्याशी पसंद नहीं था, इसलिए हम वोट नहीं दिए। यही सच्चाई है।”

अररिया जिले की फारबिसगंज सीट से पहली बार विधायक बने मनोज बिश्वास के अलावा कांग्रेस के वाल्मीकि नगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, मनिहारी विधायक मनोहर प्रसाद सिंह और राजद के ढाका विधायक फैसल रहमान ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं दिया। इन 4 वोट की कमी के कारण राजद के उम्मीदवार और निवर्तमान सांसद एडी सिंह हार गए और अपनी सीट नहीं बचा सके। उनको ये 4 वोट मिल जाते तो 41 वोट के साथ वो पहली वरीयता के मतों की गिनती में ही जीत जाते। 4 विधायकों के गायब होने से उनको 37 वोट मिले और पहली वरीयता के मात्र 30 वोट लाने वाले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शिवेश राम ने दूसरी वरीयता के मतों से उन्हें हरा दिया।

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