‘पहले ही चेताया था…’ विक्रमशिला सेतु हादसे पर तेजस्वी के बाद कांग्रेस का NDA पर वार
भागलपुर के कांग्रेस के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने विक्रमशिला सेतु हादसे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 10 महीने पहले विधानसभा में चेतावनी देने के बावजूद मंत्री ने पुल को सुरक्षित बताया था। शर्मा ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Vikramshila Setu Collapse: बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बाद अब कांग्रेस पार्टी ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। भागलपुर से कांग्रेस के पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने विक्रमशिला सेतु के स्पैन के क्षतिग्रस्त की घटना को राज्य सरकार और प्रशासन की घोर लापरवाही करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस पुल की जर्जर हालत के बारे में उन्होंने 10 महीने पहले ही विधानसभा में सरकार को आगाह कर दिया था, लेकिन उनकी चेतावनी को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया।
'मंत्री जी ने कहा था- पुल सुरक्षित है'
पूर्व विधायक अजीत शर्मा ने अपने एक बयान में बताया कि विक्रमशिला सेतु उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाला एक बेहद अहम पुल है, जो नौगछिया, कोसी और सीमांचल के क्षेत्रों को सीधे जोड़ता है। उन्होंने कहा कि पुल के एक्सपेंशन जॉइंट्स के फैलने और पुल के खतरे में होने की चर्चा काफी समय से चल रही थी। शर्मा ने बताया, "मैंने करीब 10 महीने पहले विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। लेकिन तब संबंधित विभाग के तत्कालीन मंत्री ने सदन में यह जवाब दिया था कि पुल पूरी तरह से सुरक्षित है और कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। 10 महीने पहले मेरी चेतावनी पर सरकार या प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया और आज उसी लापरवाही का नतीजा है कि पुल का स्पैन धंस गया।"
'लाखों की आबादी परेशान'
कांग्रेस के पूर्व विधायक ने कहा कि यह तो गनीमत रही कि जब यह हादसा हुआ, तब कोई बड़ा वाहन या यात्री वहां से नहीं गुजर रहा था, वरना कई लोगों की जान जा सकती थी। उन्होंने कहा कि पुल के क्षतिग्रस्त होने से अब लाखों की आबादी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसान, व्यापारी और आम लोग सभी परेशान हैं। यहां तक कि मरीजों को इलाज के लिए भागलपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचने में भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अजीत शर्मा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से यह मांग की है कि 10 महीने पहले मेरी चेतावनी की अनदेखी करने वाले सभी प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।




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